Tuesday, March 28, 2017

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कविता  ज़िंदगी और मौसम
प्रियंका गुप्ता

बचपन में मैंने
सूरज से दोस्ती की;
जवानी में
चाँदनी रातें मुझे लुभाती रही,
आधी ज़िन्दगी गुज़र गई
मैंने बर्फ़ पड़ते नहीं देखी;
अब
उम्र के इस मोड़ पर
रिश्तों पर पड़ी बर्फ़
पिघलाने के लिए
मुझे फिर
सूरज का इंतज़ार है ।

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13 comments:

  1. बहुत सुन्दर मनोभाव

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  2. उत्तम चिन्तन से परिपूर्ण सुंदर कविता

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  3. Bahut sundar bhav hain meri shubhkamnayen...

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  4. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना !

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  5. 'फिर सूरज का इंतज़ार है'|सुंदर भाव
    पुष्पा मेहरा

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  6. कोमल भाव की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति |

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  7. प्रियंका गुप्ता जी जीवन के तीन रंगों का सुन्दर भाव पूर्ण वर्णन ,बचपन जवानी बुढ़ापा । कम शब्दों मे बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति कर दी है आपने जिन्दगी को मौसम के साथ जोड़कर ।

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  8. सुन्दर प्रस्तुति

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  9. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना।

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  10. सूरज, चाँदनी, बर्फ़ प्रतीकों से गहन क्षणिका बनी है।

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  11. आप सभी का दिल से आभार...|

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