Sunday, March 12, 2017

715



 फिर फिर याद आती वो गाँव  की होली
कमला निखुर्पा
 



फगुनाई सी भोर नवेली
अलसाई सी दुपहरिया ।
साँझ सलोनी सुरमई -सी
होली के रंग  रँगी रतियाँ  ।
सखियाँ के संग हँसी-ठिठोली
भुला नहीं पाती वो होली।

चुपके से पीछे से आकर
भर-भर हाथ गुलाल लगाती।
सिंदूरी टीका माथे पर
हँसी अबीरी बिखरा जाती।
हठीली ननद भाभी अलबेली  भुला नही पाती वो होली।

जलता अलाव खुले आँगन में
साँझ ढले सब मिलजुल गाते
होली के गीतों के धुन में
मथुरा-गोकुल की सैर कराते।
घुंघुरू सी बजती गाँव की बोली ।
भुला नहीं पाती वो होली ।


ढोलक चंग ढप की थाप पे
ताल बेताल नाचे हुरियार
इंद्रधनुषी परिधान हुए हैं
मुखड़े पे रंगों की बहार ।
झूमे हुरियारों की टोली
भुला नहीं पाती वो होली ।

साड़ी पहन घूँघट में आए।
स्वांग बने काका शर्माए।
रंगों की बौछार में भीगे
ठुमका लगा कमर मटकाए।
देती ताली काकी भोली
भुला नहीं पाती वो होली ।

जाने जहाँ खोई वो होली ।
बहुत याद आती वो होली ।
-0-

18 comments:

  1. फागुन की मनभावन कविता के लिये कमला जी बहुत बधाई ।होली की मुबारकबाद ।
    सनेह विभाओ

    ReplyDelete
  2. खूबसूरत !!Kamla ji.Congratez

    ReplyDelete
  3. होली के रंगों संग रची बसी मनभावन सरल रचना हेतु बधाई |

    ReplyDelete
  4. सरल सी रचना को मिले स्नेह के लिए आभार | आप सभी को रंगोत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर रचना,कमला बहिन को हार्दिक बधाई
    होली की भी सहज साहित्य परिवार को शुभ कामनाएं

    ReplyDelete
  6. जाने जहाँ खोई वो होली ।
    बहुत याद आती वो होली । सचमुच बहुत याद आती वो होली | बधाई सुंदर रचना के लिए |

    शशि पाधा

    ReplyDelete
  7. कमला चित्र और रचनाएँ दोनों ही बहुत खूबसूरत हार्दिक बधाई आपको
    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

    ReplyDelete
  8. वाह !! होली के रंग तो हैं ही खूबसूरत साथ में यादों के रंग और भी लाजवाब ।



    ढोलक चंग ढप की थाप पे
    ताल बेताल नाचे हुरियार
    इंद्रधनुषी परिधान हुए हैं
    मुखड़े पे रंगों की बहार ।
    झूमे हुरियारों की टोली
    भुला नहीं पाती वो होली ।

    बहुत अच्छी पंक्तियां।
    बधाई कमला जी

    ReplyDelete
  9. रंग भरी मीठी यादों से बुनी बहुत खूबसूरत रचना.....होली की ढेरों शुभकामनाएँ कमला जी।

    ReplyDelete
  10. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज मंगलवार (14-03-2017) को

    "मचा है चारों ओर धमाल" (चर्चा अंक-2605)

    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद महोदय

      Delete
  11. सभी स्नेही मित्रों का हार्दिक आभार
    परम स्नेही काम्बोज भाई का धन्यवाद जिनकी वजह से आप सबका स्नेह मिला

    ReplyDelete
  12. सभी स्नेही मित्रों का हार्दिक आभार
    परम स्नेही काम्बोज भाई का धन्यवाद जिनकी वजह से आप सबका स्नेह मिला

    ReplyDelete
  13. बहुत सुंदर कविता! सचमुच! बचपन की होली तो भुलाए नहीं भूलती !
    हार्दिक बधाई कमला जी !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

    ReplyDelete
  14. बहुत खूबसूरत रचना.....सचमुच बहुत याद आती वो होली !@!!
    ढेरों शुभकामनाएँ कमला जी!!!

    ReplyDelete
  15. वाह वाह...कितनी यादें आ गई वापस...बहुत बधाई इस मनोहारी रंग बिरंगी रचना के लिए...|

    ReplyDelete
  16. Bahut khub likha hai meri badhai..

    ReplyDelete