Wednesday, March 1, 2017

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डोगरी गीत लोक गीत

चम्बे दिए डालड़िए
मोइए! दुआस नी औ 
ते कल उन्नें आई पुज्जना
बनी बनी फुल्ली फुल्ली पौ ।

औन्दें गे उनें तुगी
गले कन्ने लाई लैना 
चट्ट गे मनाई लैना
चट्ट गे हंसाई लैना
चुक्की जाने तेरे सारे रौ
मोइए! दुआस नी औ ।

ओ तुगी चन्ने  ओंगन 
प्यारे लगदे ने 
न्हेरिएँ रातीं
लश्कारे बजदे ने 
चौनें पासें होई जंदी लौ ।
मोइए! दुआस नी औ 
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 हिन्दी अनुवाद -शशि पाधा

ओ चम्पा की कोमल डाली !
मोइए, उदास मत हो
कल तो वो लौट आएँगे
बनो सजो , फूलों सी खिलो ।

आते ही वो तुझे
गले से लगा लेंगे
झट ही मना लेंगे
झट ही हँसा लेंगे
मिट जाएँगे तेरे सारे गिले
मोइए! उदास मत हो ।

वो तुझे चाँद से
प्यारे लगेंगे
अँधेरी रातों में
लश्कारे लगेंगे
हो जाएगी चारों ओर लौ
 मोइए! उदास मत हो ।
 प्रसिद्ध डोगरी लोक गीत  
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[मोइए संबोधन प्यार से किसी भी नवयुवती के लिए प्रयोग किया जाता है । शाब्दिक अर्थ है- मृत प्राय लगने वाली ।]
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15 comments:

  1. बहुत मनमोहक गीत शशि जी... बहुत बधाई।

    सहज साहित्य के दस वर्ष पूर्ण होने पर आ० काम्बोज जी आपको हार्दिक बधाई।

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  2. सुन्दर ,मधुर गीत दीदी ..बहुत बधाई !

    सहज साहित्य के दस वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई ..बहुत शुभकामनाएँ !!

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  3. बहुत सुंदर गीत शशि पाधा जी ..हार्दिक बधाई

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  4. Sundar abhivykti...shubhkamnayen..

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  5. बहुत मधुर गीत ,बड़िया अनुवाद ।शशि जी शुभकामनायें बधाई । सहज साहित्य ने जीवन के दस कदम चल लिये ऐसे ही उत्कृष्ट रचनायों के साथ अनेकानेक कदम चले हार्दिक शुभ कामनायें ।

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  6. बहुत ही प्यारा व मधुर गीत !
    हार्दिक बधाई शशि दीदी !

    ~सादर
    अनिता ललित

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  7. डोगरी लोक गीत को आपका स्नेह मिला , आभार |यह गीत हम सदियों से शादी -ब्याह या किसी भी उत्सव में गाते हैं | हिन्दी अनुवाद में मैं पूरा न्याय कर सकी कि नहीं , यह बात आदरणीय भैया ही बतायेंगे | सहज साहित्य के दस वर्ष पूरे होने पर रामेश्वर भैया को बधाई | इस ब्लॉग से हमें और लिखने की ऊर्जा मिलती है |शुभकामनाएँ |

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  8. वाह
    Bahut khub..Shashi ji ..congrates

    Respected sir..Apko or Sehaj Sahitya ke Sbhi
    Members ko Congrates...

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  9. सुंदर लोकगीत का सुंदर अनुवाद शशि जी बधाई,ब्लोगों के शीर्ष पर स्थापित 'सहज साहित्य' के दस वर्ष पूरे होने पर काम्बोज भाई जी को
    बधाई |
    पुष्पा मेहरा

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  10. बहुत सुंदर लोकगीत ....बहुत बहुत बधाईयां

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  11. बहुत सुन्दर मनमोहक लोकगीत है डोगरी के इस गीत का हिंदी अनुवाद भी बहुत अच्छा लगा यदि आप अनुवाद ना करती तो शायद हम इसका अर्थ समझ ही ना पाते |हार्दिक बधाई शशि जी |

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  12. सहज साहित्य के दस वर्ष पूरे होने पर भाई कम्बोज जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं |

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  13. बहुत ही मधुर गीत !
    हार्दिक बधाई शशि जी!!
    सहज साहित्य के दस वर्ष पूरे होने पर भाई कम्बोज जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !!!

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  14. सहज साहित्य के दस वर्ष पूरे होने पर काम्बोज भाई को बधाई और सादर शुभकामनाएँ. डोगरी गीत बहुत भावपूर्ण है. शशि जी को बधाई.

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  15. सहज साहित्य ने अपने खूबसूरत दस वर्ष इतनी सफलता के साथ पूरे कर लिए, बहुत बहुत बधाई...|
    यह लोकगीत कितना मधुर है, देश की मिट्टी की गंध अंतर्मन महका जाती है...| बहुत बधाई और आभार...|

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