Wednesday, February 1, 2017

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1-कुण्डलियाँ-अनिता ललित 
1
अर्पित भाव-सुमन तुझे, है माँ तुझे प्रणाम
नयनन छवि तेरी बसी, होठों पर है नाम
होठों पर है नाम, करूँ विनती बस इतनी
आखर-आखर गढ़ूँ, पीर हर दिल हो जितनी
तेरा हो आशीष, रहे हर तन-मन हर्षित
देना ज्ञान का दान, तुझे मन-गागर अर्पित ||
2
छाई सरसों की महक, बाजे मन के तार
धरा आज मुस्का रही, करे पीत-सिंगार
करे पीत-सिंगार, गगन भी है हर्षाया
धरा-मिलन को आज, पहनकर किरणें आया,
चला शरद मुख मोड़, विदा की बेला आई
द्वार खड़े हेमंत, ख़ुशी कलियों पर छाई ||
-0-
2-गीत- मंजूषा मन

आज मन कुछ अनमना है
गीत गाओ...
आँख से दरिया बहा है
गीत गाओ...

भूल बैठे वो अगर तो
भी भला है,
ज़िन्दगी से अब हमें भी
क्यों गिला है।
एक अपने ने छला है
गीत गाओ....
आज मन कुछ....

बात दिल की कौन समझे
अब यहाँ पर,
खूब रोहैं तुझे हम
आजमाकर।
दर्द का रिश्ता बना है
गीत गाओ।
आज मन  कुछ.....

आज मन कुछ अनमना है
गीत गाओ,
आँख से दरिया बहा है
गीत गाओ।
-0-

16 comments:

  1. अनिता ललित की कुंडलियाँ अत्यधिक पसंद आयी |मंजूषा जी का गीत आज मन कुछ अनमना है गीत गाओ ....ने मन को गहरे छुआ |दोनों रचनाकारों को उनकी सृजनात्मक कला के लिए हार्दिक बधाई |

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  2. अनिता दी, मंजूषा दी सुंदर रचनाएँ।

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  3. अनीता जी लाजवाब कुण्डलियाँ

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  4. सुन्दर कुण्डलियाँ और मन मोहक गीत अनिता जी ,मन जी ..बहुत-बहुत बधाई !

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  5. मंजूषा जी शानदार गीत वाह

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  6. अनिता जी
    बेहतरीन लिखा...बधाई

    मंजूषा जी ...सत्य के कड़वे घूँट !!पर जिंदगी में गुनगुनाना ही पड़ेगा !!!

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  7. प्रिय अनिता जी की कुण्डलियाँ बहुत मनमोहक व मन जी का प्यारा सा गीत बहुत भा गया । काव्यात्मक रचनाओं के लिये बधाई लें ।
    सनेह विभा रश्मि

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  8. प्रिय अनिता जी की कुण्डलियाँ बहुत मनमोहक व मन जी का प्यारा सा गीत बहुत भा गया । काव्यात्मक रचनाओं के लिये बधाई लें ।
    सनेह विभा रश्मि

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  9. sunder, Anita aur Manjusha ji badhai. pushpa mehra

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  10. गीत और कुण्डलियाँ दोनों बहुत सुन्दर। अनीता जी, मंजूषा जी आप दोनों को बहुत बधाई।

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  11. अनीता जी एवं मन जी को बधाई एवं शुभकामनाएं; सुन्दर रचनाओं हेतु/

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  12. मन मोहक कुण्डलियाँ और सुन्दर गीत ... .अनीता जी, मंजूषा जी आप दोनों को .बहुत-बहुत बधाई !!!

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  13. कुण्डलियाँ

    धरा आज मुस्का रही, करे पीत-सिंगार
    करे पीत-सिंगार, गगन भी है हर्षाया
    धरा-मिलन को आज, पहनकर किरणें आया,
    चला शरद मुख मोड़, विदा की बेला आई
    द्वार खड़े हेमंत, ख़ुशी कलियों पर छाई ||

    पंक्तियों ने आँखों के समक्ष सुन्दर चित्र प्रस्तुत कर दिया

    मंजूषाजी का गीत बहुत सुन्दर ... खूब रोए हैं तुझे हम
    आजमाकर।
    दर्द का रिश्ता बना है
    गीत गाओ।

    बेहतरीन ...दोनों रचनाकारों को बधाई

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  14. As usual amazing article .... really fantastic .... Thanks for sharing this!! :) :)

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  15. Bahut sundar krti meri shubhkamnayen...

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  16. बहुत बेहतरीन रचनाएँ...मेरी हार्दिक बधाई...|

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