Friday, October 28, 2016

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प्रमाणिका छन्द
ज्योत्स्ना प्रदीप

हिमाद्रि जो व्यथा सहे ।
किसे वही कथा  कहे ।।
हरी भरी नहीं धरा ।
विहंग का हिया भरा ।।

न छाँव  है  न ठौर है ।
न पेड़  है    बौर है ।।
न हास है न नीर है ।
बयार भी अधीर है ।।

ली ही  उसाँस है ।
भला कहाँ विकास है।।
नदी  लुटी पिटी घटी ।
कहाँ -कहाँ नहीं बँटी ।।

तरंग गंग अंग की ।
रही नहीं भुजंग सी ।।
मिटी नदी वसुंधरा ।
इन्हें कभी नहीं तरा ।।

दया नहीं तजें कभी
न ज्ञान  ही  न मर्म ही
सुधा भरें  उसे तरें 
हरी भरी धरा करें ।।
-0-
दिवाली के दोहे- 
रेनू सिंह
 
खुशियों के इस पर्व पर,याद रखो यह बात।
मन मंदिर रोशन करो,जगमग होगी रात।।

पैसों से मत तोलना,त्यौहारों का मोल।
हँसी ख़ुशी सौगात दो,मीठे से दो बोल।।

धूम धड़ाका मच रहा,क्यूँ करते हो शोर।
रंगत सबकी धुल रही,देखो चारों ओर।।

धूल धुँए में दम घुटे, बहरे होते कान।
धरती मत छलनी करो,छोडो झूठी शान।।

उस घर का चूल्हा जले,रोटी जिनकी चाक।
बिजली से दीपक जले,उनपर डालो खाक।।
-0-

12 comments:

  1. ज्योत्स्ना प्रदीपजी बहुत सुंदर प्रमाणिका छंद।बधाई

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  2. रेणु सिंह जीदीवाली से सम्बंधित सुंदर दोहे। बधाई

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  3. आप दोनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  4. ज्योत्स्ना प्रदीप जी बहुत खूबसूरत प्रमाणिका छंद। रेनू जी बहुत सुन्दर दोहे आखिरी वाला दोहा बहुत अच्छा लगा। आप दोनों को दीपावली की बहुत शुभकामनाएं ।

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  5. बहुत सुंदर,मोहक छंद रचे ज्योत्सना जी ,रेनू जी !
    हार्दिक बधाई ... दीपावली की बहुत शुभकामनाएँ !!

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  6. ज्योत्स्ना प्रदीप जी, रेनू जी सुंदर प्रस्तुति। बधाई।

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  7. बेहतरीन छंद एवं दोहे
    ज्योत्सना जी एवं रेनू सिंह जी.....

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  8. बहुत सुन्दर

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  9. भैया जी का हृदय -तल से आभार जिनके कारण हमें बहुत कुछ सीखनें को मिल रहा हैं ||सादर नमन है ऐसे गुरूजी को !!!

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  10. रेणुजी बहुत सुंदर दोहे। बधाई!!!

    आप सभी की दिल से आभारी हूँ !!!

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  11. रेनू जी ज्योत्स्ना जी बहुत सुंदर वाहह्ह्ह्ह्..हार्दिक बधाई आप दोनों को

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  12. बहुत मनमोहक और सार्थक रचनाएँ...| आप दोनों को हार्दिक बधाई...|

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