Thursday, July 21, 2016

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श्वेता राय के तीन गीत
भोर गीत
किरणें आकर भोर से, छेड़े मधुरित राग है।
मुदित हृदय यह देख के, गाये एक विहाग है।।

छूकर मलयागिरि पवन, खिलते सबके गात हैं।
पुलकित हो कर साथ में, हिलते सब तरू पात हैं।।
सुघर धरा के भाल पर, स्वर्णिम भोर सुहाग है।
मुदित हृदय यह देख के, गा एक विहाग है।।

पंछी के स्वर में बसी, बातें सब मन मीत की।
दूर्वा दल पर शोभती, पावस बूँदें प्रीत की।।
कण कण में बिखरा हुआ, द्रुम दल पुष्प पराग है।
मुदित हृदय यह देख कर, गाएक विहाग है।।

प्राची से जीवन जगे, जाये पश्चिम छोर तक।
प्रेम पथी बन प्रीत को, बिखरा चहुँ ओर तक।।
अलसा मन में भरे, रंगों का नित फ़ाग है।
मुदित हृदय यह देख कर, गा एक विहाग है।।

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2-बरसात, याद और तुम
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रिमझिम पलछिन गिर रही, बाहर ये बरसात है।
नयनो से भी झर रही, रिमझिम दिन औ रात है।।
आकुल मन आहें भरे, व्याकुळ होते प्राण है।
तेरी सुधि बन दामिनी, लेती मेरी जान है।।

पंकिल जीवन बन गया, प्रीत कुमुद की आस में।
चुपके से करुणा हँसे, दुख के इस परिहास में।।
पुरवाई की चोट से, शिथिल पड़ा ये गात है।
यौवन का दिन ढ़ल रहा, लम्बा जीवन रात है।।

आँसू बन भाषा गअधर चढ़ा इक मौन है।
जग में अब लगता नही, मेरा अपना कौन है।।
आ जाओ प्रिय आज तुम, पा जाऊँ मुस्कान मैं।
जीवन कुसुमित बाग़ की, बन जाऊँ पहचान मैं।।

घुल जायें स्वर कोकिला, धड़कन की हर बात में।
हरियाली दिन सब लगे, झूमे चंदा रात में।।
मन मयूर बन बावरा, खुशियाँ बाँधें पाँव में।
बीते जीवन प्रेम में, प्रीत भरी मधु छाँव में।।

आ जा रे साजना, सावन की बरसात में
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3-मेरी हो पहचान तुम

खिलते हिय के बाग़ में, सुमनों की मुस्कान तुम।
सपन सलोने प्रिय सुनो, मेरी हो पहचान तुम।।

सूना मन का था सदन, आये तुम मधु चाप से।
प्रेम पुजारी बने प्रिये, स्वप्न सजे दृग आप से।।
पूजा थाली थाम लिये, बन जग से अनजान तुम।
सपन सलोने प्रिय सुनो, मेरी हो पहचान तुम।।

मन के मरूथल में बही, प्रीत भरी रसधार है।
पतझड़ बीता, बाग़ अब, भ्रमरों से गुंजार है।।
साँसो से बँध बन गए, जीवन के अब मान तुम।
सपन सलोने प्रिय सुनो, मेरी हो पहचान तुम।।

हाथों में ले हाथ प्रिये, भूली सारे भार को।
अब कब चाहूँ गूँथना, पीड़ा आँसू हार को।।
डूबती जीवन नदी मैं, तिनका सम जलयान तुम।
सपन सलोने प्रिय सुनो, मेरी हो पहचान तुम।।

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श्वेता राय, विज्ञान अध्यापिका,पूर्व माध्यमिक विद्यालय
परसिया भंडारी,देवरिया,उत्तर प्रदेश
मोब 9044375683

11 comments:

  1. अत्यंत सुंदर एवं मधुर गीत !मनमोहक प्रस्तुति!
    हार्दिक बधाई श्वेता जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

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  2. बहुत सुन्दर, सरस गीत श्वेता जी हार्दिक बधाई!

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  3. बहुत बहुत बधाई श्वेता ! सुन्दर सुन्दर प्यारे गीत

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  4. बहुत सुन्दर , मनमोहक प्रस्तुति!हार्दिक बधाई श्वेता जी !

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  5. बहुत सरस ,मोहक गीत ..
    हार्दिक बधाई श्वेता जी !

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  6. बहुत सुंदर , मनमोहक गीत। हार्दिक बधाई।

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  7. बहुत सुन्दर गीत श्वेता राय जी
    हार्दिक बधाई

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  8. बहुत सरस और मनभावन गीत हैं श्वेता जी...आपको बहुत बधाई...|

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  9. bahut khub ! bahut bahut badhai...

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