Tuesday, February 2, 2016

613



बिम्ब
पुष्पा मेहरा

इस जग- दर्पण के
टूटते बिखरते से टुकड़ों -बीच
देखते देखते ही प्रत्यक्ष होते अनेक दृश्य
मेरी आँखों में समा रहे हैं
काँस के फूलों से घिरे( आतंकी ) बादलों के,
कैशमिलान के छोटे बड़े ऊन के गोलों की तरह
अनसुलझे प्रश्न- बटों के,
बहती नदी की रुकने का संकेत देती धारा सी-
सिकुड़ती-सहमती नव यौवनाओं के
होंठों की लुटी- पिटी मुस्कान के, जो
हबश की नदी की हरहराती बाढ़ में
न जाने कबसे डूबती रही है |
फूलों की खुशबू दबा सोई
-अनखिली कलियों की सूखी पंखुरियों के ,
जिन्हें देख मेरे ज़ेहन में ,
एक और भयावह पर सत्य बिम्ब ,समाने लगा है जिसमें
रातों को घेरे रहता है एक निर्मम सन्नाटा कि
हरसिंगार खिलते ही झर जाता है ,
समवेदनाएँ जागने से पहले ही उजाड़ के
क्षत- विक्षत कर फ़ेंकीं जा रहीं है |
शहरों में आवारा कुत्तों का जमघट
भावी संततियों- खातिर पार्कों की क्यारियाँ
उजाड़ रहा है ,
टिटिहरी अंडे सेने की जगह तलाश रही है ,
तिजोरियों में बंद धन धनाढ्यों की नींदे
खरीद चुका है |
पूर्वजों की गाढ़ी कमाई से गढ़े घर
जिनमें कभी आत्मीयता ,प्यार और विश्वास
चन्दन की खुशबू सा बसता था आज
हवाओं के बदलते रुख़ उन्हें शिरोमूल से
ढहाने में लगे हैं |
इन नाना दृश्यों के बीच फँसी मैं राह खोज
एक ऐसा गढ़ रचने की कल्पना में डूबी हूँ ,
जिसकी दीवारों की ईंट ईंट में ,
जिसके आँगन आँगन में एक अखंडित दर्पणहो ,
विश्वास- स्नेह की तरलता हो और हो
अटूट रिश्तों की सघन छाया ,
ना भय हो , ना हिंसा हो ,
ना ही ईर्ष्या द्वेष हो , यदि
दर्पण में कोई बिम्ब हो तो अशक्त काँधों पर
किसी सशक्त के हाथ का हो,
गूँज में कोई गूँज हो तो
बस एक आत्मीयता भरे
मृदु स्पर्शों के छुअन की ध्वनि की ही हो |
-0-
   pushpa .mehra @ gmail .com   

18 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति

    ReplyDelete
  2. हृदयतल को छूने वाली सुन्दर कविता ।बधाई पुष्पा मेहरा जी

    ReplyDelete
  3. भावपूर्ण रचना हार्दिक बधाई पुष्पा जी !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर रचना, पुष्पा जी, शुभकामनाएँ !

    ReplyDelete
  5. अत्यंत भावपूर्ण रचना । बधाई पुष्पा जी !

    ReplyDelete
  6. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  7. इस अत्यंत भावपूर्ण रचना के सृजन पर पुष्पा जी आपको हार्दिक बधाई .

    ReplyDelete
  8. बहुत भावप्रवण रचना...हार्दिक बधाई...|

    ReplyDelete
  9. अत्यंत भावपूर्ण रचना .. .हार्दिक बधाई पुष्पा जी !

    ReplyDelete
  10. सुन्दर और भावपूर्ण रचना।

    ReplyDelete
  11. सुरेन्द्र वर्मा06 February, 2016 10:53

    अनेक सुन्दर बिम्बों से सजी बहुत ही भावप्रवण,सार्थक और सुन्दर रचना के लिए पुष्पा जी को हार्दिक बधाई.
    सुरेन्द्र वर्मा

    ReplyDelete
  12. सर्वप्रथम मैं भाई कम्बोज जी की आभारी हूँ जिन्होंने अपने उत्कृष्टतमब्लॉग में मेरी कविता को स्थान दिया उसके बाद मैं अपने साथी रचनाकारों के साथ ही श्रद्धेय वर्मा जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करती हूँ जिनकी उत्साहवर्द्धक प्रतिक्रिया ने मेरा मनोबल बढ़ाया है|
    पुष्पा मेहरा




    ReplyDelete
  13. bahut sundar hardik badhai...

    ReplyDelete
  14. अपने ब्लॉग'deep'में 'सहज साहित्य' और मेरी कविता को स्थान देने हेतु ई. प्रदीप साहनी जी का आभार |

    पुष्पा मेहरा

    ReplyDelete