Sunday, December 27, 2015

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1-भावना सक्सैना

गीली मिट्टी
अब जल्दी सूख जाती है
गूँथने में ही कुछ कमी होगी
स्निग्धता छुअन में न हो
या हवा में कम नमी होगी।
पकने से पहले पड़ें दरारें जो
पकने पर और फैल जाती हैं
भीतर की रिसन और टूटन
खोखला तन मन करके जाती है।

दो बूँद तरलता के बढ़ा
क्यों न और इसको गूँथें ज़रा
बीन दें कचरा सभी ज़माने का
जोड़ स्नेह के अणु -कण
नम हाथों से छूकर फिर- फिर
ऐसे गूँथें कि सम हो  बाहर भीतर
हो नरम कि सहज ही ढले
ताप समय का जब पकाए इसे
पकके चमके ये फिर सदा के लिए।
-0-

2-प्रियंका गुप्ता

करती रही रोज़
जोड़-घटाना
गुणा-भाग
जतन किए बहुत
पर फिर भी अपने हाथ
कुछ न आया
सिवाय ज़ीरो के
बहुत हिसाब-किताब लगा लिया
ज़िन्दगी,
तेरे पास
मेरा बकाया बहुत है...।
-0-


38 comments:

  1. वाह भावना जी, प्रियंका जी आप दोनों की लेखनी प्रणम्य है।

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    1. धन्यवाद अनीता जी

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  2. गीली मिट्टी
    अब जल्दी सूख जाती है
    गूँथने में ही कुछ कमी होगी
    स्निग्धता छुअन में न हो
    या हवा में कम नमी होगी। यथार्थ कहती सुन्दर रचना भावना जी हार्दिक बधाई !

    करती रही रोज़ ...बहुत भावपूर्ण रचना प्रियंका जी बहुत बधाई !!

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    1. हार्दिक धन्यवाद ज्योत्सना जी।

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  3. बीन दें कचरा सभी ज़माने का
    जोड़ स्नेह के अणु -कण
    नम हाथों से छूकर फिर- फिर
    ऐसे गूँथें कि सम हो बाहर भीतर......अति सुंदर भावना जी।
    प्रियंका जी बहुत मार्मिक रचना है। बधाई !

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    1. धन्यवाद सुशीला जी

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    2. धन्यवाद सुशीला जी

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  4. भावनाजी,प्रियंकाजी बहुतसुंदर भावपूर्ण कविताएँ दोनों कोबधाई।

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    1. उत्साहवर्धन के लिए हृदय से धन्यवाद दी।

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  5. भावना जी सही कहा गीलीमिट्टी कुछ निर्मिति के लिये सहज नही तैयार होती अनुपात ठीक न हो तो यही होता है जल्दी सूखेगी ही । इसी बात को अगर हम मसाला तैयार करने बिल्डिंगे बनाने वालों के कृत्य की ओर देखें तो यही परिणाम होता है बनते बनते बिल्डिंग ढेर हो जाती हैं ।गहरे अर्थ भरी आप की कविता बहुत अच्छी लगी ।बधाई आप को नये रूपों विचारों मे कविता लिखने के लिये
    और प्रियंका गुप्ता जी आप का हिसाब किताब भी अच्छा लगा । बधाई आप को भी ।

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    1. कमला जी धन्यवाद

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    2. कमला जी धन्यवाद

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  6. दोनो कविताएँ सार्थक एवं भावपूर्ण...भावना जी की गीली मिट्टी जीवन को संजो रही...
    और प्रियंका की रचना आत्मवुश्वास से भरी...बधाई दोनों रचनाकारों को !

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    1. ऋता जी धन्यवाद।

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    2. ऋता जी धन्यवाद।

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  7. बहुत दिनों के बाद कुछ ऐसा पढ़ने को मिला, जो कहीं गहरे तक मन को छू गया!

    दोनो ही रचनाएँ बेहद सार्थक एवं सशक्त हैं. भावना जी ने मिट्टी के माध्यम से जो संदेश दिया है वो सुंदर एवं सार्थक जीवन को जीने का गुर सिखाता है

    प्रियंका जी की रचना हमेशा की तरह अनूठे आत्मविश्वास से भरी हुयी ।

    दोनों सखियों को सुंदर रचनाओं के लिए बहुत बहुत बधाई

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    1. मंजू जी, आपके शब्द हृदय को छू गए। धन्यवाद।

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  8. भावना जी, मिट्टी से तो पूरा जीवन ही जुड़ा है बहुत गहरे...| बहुत गहन भाव आपने बड़ी सहजता से प्रस्तुत कर दिए...| एक खुबसूरत रचना के लिए बहुत बधाई...|
    आदरणीय कम्बोज जी का बहुत आभार...और आप सब को मेरा बहुत शुक्रिया...दिल से...|

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    1. धन्यवाद प्रियंका जी

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    2. धन्यवाद प्रियंका जी

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  9. बहुत सुन्दर कवितायेँ. प्रतीकात्मक रूप से इशारों में अपनी बात कहती हुईं|
    सुरेन्द्र वर्मा

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    1. बहुत धन्यवाद डॉ वर्मा जी।

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  10. दोनों रचनाएँ बेहद ख़ूबसूरत ! इतनी अर्थपूर्ण कविताएँ लम्बे समय बाद पढ़ने को मिलीं! भावना जी और प्रियंका जी शुभकामनाएं!!

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    1. सराहना के लिए आभार अमित जी।

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  11. बहुत ही गहरी बातें भावना और प्रियंका जी। बधाई । सभी सदस्यों को नव वर्ष की शुभकामनाएं।

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  12. रचना को यहाँ स्थान देने के लिए आदरणीय भाई साहब का हृदय से आभार।
    प्रियंका जी सुन्दर रचना, सच में ज़िन्दगी पर हिसाब बहुत हैं।

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  13. रचना को यहाँ स्थान देने के लिए आदरणीय भाई साहब का हृदय से आभार।
    प्रियंका जी सुन्दर रचना, सच में ज़िन्दगी पर हिसाब बहुत हैं।

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  14. बहुत गहरी, सार्थक भावपूर्ण कविताएं।
    भावना जी, प्रियंक जी बहुत-बहुत बधाई।

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  15. भावना जी एवं प्रियंका जी ने अपनी सुंदर एवं प्रतीकात्मक शैली में अत्यंत ज्वलंत प्रश्न उठाये हैं, बधाई एवं शुभकामना दोनों ही कवयित्रियों को

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  16. प्रियंका जी और भावना जी हार्दिक बधाई एवं शुभकामना बहुत गहरी सार्थक भावपूर्ण कविताओं

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  17. भावना जी एवं प्रियंका जी भावों कासुदर व सटीक नियोजन बधाई

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  18. भावना जी एवं प्रियंका जी भावों कासुदर व सटीक नियोजन बधाई

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  19. भावनाजी, बहुत भावपूर्ण कविता है |बहुत बहुत बधाई |

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  20. सचमुच आप दोनों की कविताएँ दिल में घर कर गई। पसन्द करने के लिए सभी संवेदनशील साथियों को बहुत -बहुत धन्यवाद !

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  21. संवेदना,विषय और प्रस्तुति की दृष्टि से भावना जी और प्रियंका जी दोनों ही बधाई की पात्र हैं।दार्शनिक धरातल पर खड़े होकर दोनों ही अपने अपने ढंग से जीवन के रंगो का चित्रण किया है।दोनों कविताएँ सशक्त हैं

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  22. संवेदना,विषय और प्रस्तुति की दृष्टि से भावना जी और प्रियंका जी दोनों ही बधाई की पात्र हैं।दार्शनिक धरातल पर खड़े होकर दोनों ही अपने अपने ढंग से जीवन के रंगो का चित्रण किया है।दोनों कविताएँ सशक्त हैं

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  23. भावनाजी,प्रियंकाजी बहुत सुंदर... यथार्थ कहती सुन्दर , भावपूर्ण कविताएँ.. दोनों को बधाई । सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं।

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