Saturday, December 5, 2015

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1-एक शिकायत भागते समय से
कमला निखुर्पा


समय,चलो ना संग मेरे

कहाँ छिपे हो तुम ?



साथ रहते हो हर पल

पर साथ क्यों नहीं चलते ?



हर बार हाथ छुड़ाकर

निकल जाते हो बेवफा की तरह ।



भागती रहती हूँ तुम्हारे पीछे

पर तुम हो कि...

पीछे मुड़कर देखते ही नहीं ।



हमेशा हार जाती हूँ रेस

जीवन के मैदान में ।

केवल इसलिए

कि तुम कभी पास होते ही नहीं ।

कि तुम कभी साथ देते ही नहीं ।



क्या पता

रिश्तों की भीड़ में

अनजाने से अपनों के संग।

कदम से कदम मिला कर चलने की नाकाम कोशिश

हो ना जाए भंग ।



बिखर ना जाए

नाजुक सा अस्तित्व...

केवल इसीलिए

पुकार रही कब से ...



कि ओ समय रे !

साथ चलो ना मेरे

जता सकूँ सबको

बता सकूँ सबको

हाँ समय है मेरे पास ।

आओ बैठो भी साथ

कह भी दो मन की बात ।



ख़त्म होंगे सारे शिकवे

समय चलो ना संग मेरे ।
-0-
प्राचार्या , केन्द्रीय विद्यालय नं 2, कृभको, सूरत ( गुजरात)
04 दिसंबर 2015

7 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  3. कमला निखुर्पा जी, बहुत अच्छा लगा समय के साथ वार्तालाप। शिकायत भी मनुहार भी बधाई।

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  4. कमला जी सुंदर कविता के लिए बधाईं।

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  5. सुन्दर भावप्रवण रचना कमला जी ..हार्दिक बधाई !

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  6. आभार आप सबके स्नेह का .. आज ही देख पाई ..

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  7. आभार आप सबके स्नेह का .. आज ही देख पाई ..

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