Sunday, August 9, 2015

साँवली रात से भीगी बातें



कमला निखुर्पा

साँवली रात जागती रही
तारों के साथ ।
बादलों का तकिया लगा
ऊँघता रहा चाँद ।

यादों की ओस
झरती रही बूँद- बूँद
पलकों से रात भर
भीगता रहा सपना ।

झुलाती रही हवा
पवन हिंडोला
झूमी रात रानी
टूटी बिखर गई
पर फिजाँ महका गई ।

अभी -अभी तो झपकी थी
बोझल -सी अँखियाँ
कच्ची नींद से
भोर ने जगाया तो,
कुनमुनाई,रूठीं, रो पड़ी ।
 -0-
( प्राचार्या, केन्द्रीय विद्यालय नं 2 , कृभको सूरत)
07.08.2015

13 comments:

  1. सुंदर सुकोमल कविता बहुत अच्छी लगी।बधाई।

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  2. अभी -अभी तो झपकी थी
    बोझल -सी अँखियाँ
    कच्ची नींद से
    भोर ने जगाया तो,
    कुनमुनाई,रूठीं, रो पड़ी ।
    RAAT BELAA KAA MAARMIK CHITARN . BADHAI .

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  3. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार...

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  4. सुन्दर सुकोमल कविता मन को हर्षा गई ।कितना मनमोहक लिखती हैं कमला निखुर्पा जी।... झूमी रात रानी / टूटी बिखर गई/ पर फिजाँ महका गई ।बहुत खूब वधाई बहुत बहुत।

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  5. बहुत प्यारी कविता. यादों की ओस पलकों से झरती रही और सपना भीगता रहा … बहुत सुन्दर चित्रण। कमला जी को बधाई.

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  6. jhoomi rat rani \ tooti bikhar gayi \par fijaan mahaka gayi tatha abhi -abhi to jhapaki thi , bojhal si ankhiyan ....... badali -bhari rat vo bhi yadon se bhari ...bahut sunder bhav- chitran.badhai kamla ji.
    pushpa mehra.

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  7. रात्रि बेला का सुन्दर मनमोहक चित्रण ..सुन्दर शब्द संयोजन ...बधाई

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  8. सुकांत रचना! रात का बहुत खूबसूरत चित्रण....बधाई कमला जी।

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  9. अनुपम प्रस्तुति ...कोमल कान्त शब्दों में मेघ ,चाँद , तारे संग लिए जागती रजनी का बहुत ही सुन्दर चित्रण !
    कच्ची नींद से
    भोर ने जगाया तो,
    कुनमुनाई,रूठीं, रो पड़ी ।...अब ये तो होना ही था ...बहुत सुन्दर !

    हार्दिक बधाई कमला जी !!

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  10. masum si lagi aaapki rachna komal si payari hardik badhai...

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  11. बहुत ही प्यारी, कोमल भाव लिए कविता !

    यादों की ओस
    झरती रही बूँद- बूँद
    पलकों से रात भर
    भीगता रहा सपना । -बहुत सुंदर पंक्तियाँ!

    हार्दिक बधाई कमला जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

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  12. आप सभी का बहुत आभार |

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  13. अभी -अभी तो झपकी थी
    बोझल -सी अँखियाँ
    कच्ची नींद से
    भोर ने जगाया तो,
    कुनमुनाई,रूठीं, रो पड़ी ।
    एक मासूम सी...भावपूर्ण रचना...हार्दिक बधाई...|

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