Wednesday, May 13, 2015

ये घर बना रहे



रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
ईश बस इतना करें,ये घर बना रहे।
सर झुका हो जिस जगह,वो दर बना रहे।
जिस कोने में कभी की थी आराधना
उस पर तेरी दुआ का असर बना रहे ।
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14 comments:

  1. Ameen !....duayen kabhi khaali nahin jaatee,badi shakti hoti hai in mein...bahut sunder muktak !.......himanshu ji ,aapko badhaiyon ke saath -saath duayen bhi .

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  2. ईश से यह दुआ पूरे संसार रुपी घर की सुरक्षा और मंगल के लिए है | आज जो प्रकृति का प्रकोप है , बस सब की दुआ ही प्रभु सुने | साधुवाद |

    शशि पाधा

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  3. दिल से निकले उदगार हैं. आपको उस घर के लिए जिसके लिए दुआएं मांगी हैं और सुन्दर मुक्तक के लिए बधाई . साभिवादन. -सुरेन्द्र वर्मा

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  4. अत्यंत सहज भाव से की गई यह दुआ ज़रूर क़ुबूल हो.... आमीन !

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  5. bahut sundar praarthana . sarvshaktimaan kii dayaa ke sada paatr rahein sabhi . vipat hare mangal karein prabhu .

    udaatt bhaavon se paripoorn sundar muktak !

    saadar
    jyotsna sharma

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  6. आमीन!
    बहुत सुंदर दुआओं में लिपटा मुक्तक। निःस्वार्थ भाव से की गयी दुआएँ कभी खाली नहीं जातीं।
    हिमांशु भैया जी... इस सुंदर मुक्तक के सृजन के लिए आपको हार्दिक बधाई।

    ~सादर
    अनिता ललित

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  7. nishkalush hriday se nikali dua is dharati ko akasmik prakopon se bachaye taki hamare ghar bhi suraxit rahen .usaki kripa ham sab par sada bani rahe.kamna ke sath sunder prathana sanjoye muktak likhnne hetu bhai ji apko badhai.
    pushpa mehra

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  8. बहुत सुन्दर प्रार्थना और रचना!
    ईश्वर करे ऐसा ही हो!
    काम्बोज सर अभिनन्दन!

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  9. आपके इस असीम स्नेह और प्रोत्साहन के लिए मैं हृदय से आभारी हूँ ।
    -रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

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  10. बहुत सुन्दर प्रार्थना...ईश्वर आपकी दुआ कबूल करें। ऊपर वाले की कृपा दृष्टी हम सब पर बनी रहे।
    सुन्दर मुक्तक के लिए हार्दिक बधाई भाईसाहब।

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  11. भाई काम्बोज जी बहुत आशावादी व सकारात्मक मुक्तक बधाई ,सहज साहित्य के सभी अंक सृजनात्मक प्रतिवद्धता के आदर्श उदाहरण हैं आपकी इस शब्द निष्ठां को प्रणाम

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  12. सबसे पहले तो आमीन...!
    बहुत ओजपूर्ण मुक्तक है...बहुत बधाई...|

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