Thursday, January 1, 2015

नए स्वप्न ले नयन में



कुण्डलियाँ : डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
1
नए स्वप्न  ले नयन में ,अधरों पर मुस्कान ,
समय-सखा फिर आ गया ,पहन नवल परिधान ।
पहन नवल परिधान , बजी है शहनाई -सी ,
तुहिन आवरण ओढ़ , धरा है शरमाई- सी ।                                         
किरण-करों से कौन , भला घूँघट पट खोले ,
धरा नतमुखी मौन , मुदित है नए स्वप्न  ले ।।
2
दिल को लगती कह गया , बातें बीता साल ,
सीख समय से पाठ कुछ ,बनना एक मिसाल ।
बनना एक मिसाल , सृजन की हो तैयारी ,
करें अमंगल दूर , रहें अरिदल पर भारी ।
सरस ,सुगन्धित वात ,मुदित हो सारी जगती ,
मन से मन की बात ,करें प्रिय दिल को लगती ।।
3
चंदा -सा सूरज हुआ ,बदला- बदला रूप ,
सज्जन के मन -सी हुई ,सुखद सुहानी धूप ।
सुखद सुहानी धूप ,शीत में लगती प्यारी ,
नयन तकें अब राह, भेंट है प्रभु की न्यारी ।                                         
तेजोमय का तेज ,लगे जब कुछ मंदा -सा ,
समझ समय का फेर ,न हो सूरज चंदा- सा ।।
4
कल सपनों ने नयन से ,की कुछ ऐसे बात ,
कहते सुनते ही सखी , बीती सारी रात ।
बीती सारी रात , सुनी गाथाएँ बीती ,
पढ़ा बहुत इतिहास , जंग सब कैसे जीती ।
सीख समय से पाठ ,रचा सुख किन जतनों ने ,
उड़ा दई फिर नींद ,नयन से कल सपनों ने ।। 
5
जागेगा भारत अभी ,पूरा है विश्वास ,
नित्य सुबह सूरज कहे ,रहना नहीं उदास ।
रहना नहीं उदास ,सृजन की बातें होंगी ,
कर में कलम-किताब ,सुलभ सौगातें होंगी
करे दीप उजियार ,अँधेरा डर भागेगा ,
बहुत सो लिया आज ,सुनो भारत जागेगा ।।  
6
बहुरंगी  दुनिया भले , रंग भा गए तीन ,
बस केसरिया ,सित ,हरित ,रहें वन्दना लीन ।
रहें वन्दना लीन ,सीख लें उनसे सारी ,
ओज , शूरता , त्याग ,शान्ति हो सबसे प्यारी ।
धरा करे शृंगार , वीर ही रस हो अंगी ,
नस-नस में संचार , भले दुनिया बहुरंगी  ।। 
7
बोलें जिनके कर्म ही ,ओज भरी आवाज़ ,                           
ऐसे दीपित से रतन ,जनना जननी आज ।
जनना जननी आज , सुता झाँसी की रानी ,
वीर शिवा सम पुत्र , भगत से कुछ बलिदानी ।
कुछ बिस्मिल, आज़ाद ,धर्म से देश न तोलें ,
गाँधी और सुभाष , भारती जय-जय बोलें ।।
8
लिख देंगे नव गीत हम ,भरकर जोश , उमंग ,
गूँज उठे हुंकार अब , विजय नाद के संग ।
विजय नाद के संग ,सहेजें गौरव अपना ,
करना है साकार , मात का सुन्दर सपना ।
तूफानों का वीर , पलटकर रुख रख देंगे ,
स्वर्णमयी तकदीर , वतन की हम लिख देंगे ।।
-0-

11 comments:

  1. nav urja aur nav srejan ka jvar bhari kundaliyan nav varsh mein soton ko jagane vali hain .is sunder lekhan hetu apako badhai.mere haiku ko sthan - sthan par prastut karane ke liye apako dhanyavad. naye sal ki anek shubh kamanayen.
    pushpa mehra .

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  2. विजय नाद के संग ,सहेजें गौरव अपना ,
    करना है साकार , मात का सुन्दर सपना ।
    तूफानों का वीर , पलटकर रुख रख देंगे ,
    स्वर्णमयी तकदीर , वतन की हम लिख देंगे ।।
    -bahut khoob likha hai aapne jyotsna ji....aashavaad ki dhun samete....sunder saarthak tatha desh prem chalkaati prernadaaye kavita
    ...bahu - bahut badhai.

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  3. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (03-01-2015) को "नया साल कुछ नये सवाल" (चर्चा-1847) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    नव वर्ष-2015 आपके जीवन में
    ढेर सारी खुशियों के लेकर आये
    इसी कामना के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. हृदय से आभार आदरणीया पुष्पा मेहरा जी , ज्योत्स्ना प्रदीप जी एवं रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी !

    यहाँ स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार भैया जी !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

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  5. आशा और विश्वास भरे उम्दा सृजन के लिए बहुत-बहुत बधाई ज्योत्स्ना जी!

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  6. सार्थक रचना

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  7. बेहद खूबसूरत कुण्डलियाँ। सार्थक और सामयिक।

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  8. सुंदर...नववर्ष की बधाई और शुभकामनाएं..

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  9. Wah Jyotsana, bahut hi sundar !!

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  10. सुन्दर पंक्तियाँ...हार्दिक बधाई...

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