Saturday, January 18, 2014

आहत हैं दिशाएँ

रामेश्वर काम्बोज  हिमांशु
1
तेज़ हवाएँ
घायल हुए डैने
उड़ें किधर जाएँ ?
कोहरा छाया
जीवन-पथ पर
आहत  हैं दिशाएँ।
2
कौन अपना?
हर साथी हो गया
इक टूटा सपना,
शब्दों की कीलें
चुभती दिन- रात
बोलो किसे बताएँ।
3
बेरुखी तोड़े
सारे प्यारे सम्बन्ध
जीवन-अनुबन्ध,
जब अपने
चोट दे मुस्कुराएँ
किसे दर्द बताएँ ?

-0-

Sunday, January 5, 2014

किसी से भी न गिला

1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
1
सबसे न्यारी
खुशियों की दस्तक
बहुत प्यारी !!
2
मन- निर्मल
किसी से भी न गिला
कोई तो मिला ... :)
-0-
2-मुमताज टी एच खान
1
काँटे ही सही
सुख दुख के साथी
सोचे गुलाब
2
मानव वेश
लिये बैठे  भेदिये
नोचने दे
3
री गागर
यादों के सागर से
लक उठी ।

.-0-