Thursday, October 23, 2014

दीप बने बाराती




डॉ हरदीप सन्धु
1

दीवाली रात 

दीप बने बाराती 

झूमे आँगन। 


2

मिट्टी का दिया 

चप्पा -चप्पा बलता 

बिखरती लौ। 

3

दीवट दिया 

भीतर औ बाहर 

घर रौशन। 
-0- 
ज्योत्स्ना प्रदीप
1
रात में भोर
दीपों का जमघट
क्रांति की ओर॥
2
न जात-पात
न देखे दिन- रात
दीप तो जले।
3
सहमा तम
दीपक तले छुपा
कुछ रूआँसा ।
-0-




7 comments:

  1. हरदीप जी, ज्योत्स्ना जी, आप दोनों के उम्दा हाइकु! हिमांशु जी की सुन्दर सोच, बेहतरीन पंक्तियाँ!
    आप सभी को ढेरों शुभकामनाएँ।

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  2. सुन्दर हाइकु और बेहतरीन पंक्तियों से सजे सहज साहित्य के सभी साथियों को दीपोत्सव की हार्दिक बधाई...|

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  3. हरदीप जी, ज्योत्स्ना प्रदीप जी... दीपों की माला से जगमगाते सुन्दर हाइकु !
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ भैया जी।
    हमारे सभी साथियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ~सादर
    अनिता ललित

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  4. उजाला बिखेरते बहुत सुन्दर हाइकु हार्दिक शुभ कामनाएँ तथा सर्व मंगल की भावना से परिपूर्ण भैया जी की पंक्तियों को सादर नमन !

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  5. hardeep ji, alokit haiku ke liye tatha..himanshu ji, jyotit panktiyo ke liye...ujalo se bhari badhai.saadar naman ke saath.

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  6. aap sabhi vidushiyo ka dil se aabhaar tatha pyaar bhara namaskaar...

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  7. काम्बोज जी का आशीर्वाद सब पर फलीभूत हो. दीपावली पर हरदीप जी की सुन्दर रचनाएं. साधुवाद. सुरेन्द्र वर्मा

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