Friday, August 1, 2014

जीवन -रेखा

मनोज कुमार श्रीवास्तव मनु

मनोज कुमार श्रीवास्तव मनु


जो प्राणदायिनी जीवनरेखा है
जो बहती है, हिमालय से गंगासागर तक
जो नदी नहीं ,सभ्यता है हिंदुस्तान की
जो पतितपावनी है जहान की
जो जलमात्र नहीं ,अमृत है
माँ है ,जो भारत महान् की
नाम है गंगा उसका
स्वच्छ रखना उसे
कर्त्तव्य हो हमारा सर्वोपरि
यही दृढ़ संकल्प आधार हो
अस्तित्व बचाना उसका
 हमारा कार्य   है;
अगर जीवित रहना है
तो गंगा का निर्मल रहना
अपरिहार्य है ।

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9 comments:

  1. आपकी लिखी रचना शनिवार 02 अगस्त 2014 को लिंक की जाएगी.........
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. सही कहा आपने
    सुन्दर प्रस्तुति

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  3. वाह, बहुत बढ़िया, उत्कृष्ट

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  4. सुन्दर रचना...

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    1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

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  5. bahut khoobsurat bhaav ma ganga ke liye...naman hai aapki rachna ko..

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  6. बहुत सामयिक...सुन्दर रचना...बधाई...|

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