Sunday, March 16, 2014

प्रेम में डूबी मीरा

           
 ज्योत्स्ना प्रदीप

पेण्टिंग:ज्योत्स्ना प्रदीप की माताश्री विमल जी 

प्रेम में डूबी मीरा का,दर्द मतवाला दे दो ।
सुधा समझ जिसे पी लिया,विष का वो प्याला दे दो
बचपन की हल्की धूप में ,
लिये कान्हा संग फेरे,
पावन सुख की आस लिये,
मन से हट गए अँधेरे,
उसी महाज्योति का बस थोड़ा -सा उजाला दे दो।
प्रेम में डूबी मीरा का,दर्द मतवाला दे दो ।
मीरा भटकी यहाँ -वहाँ,
जाने छिपा कहाँ प्रियतम?
चित्तौड़,मेवाड़ के मोड़ ,
द्वारका या फिर वृन्दावन !!
उन्ही भटकते पाँवों का, सिर्फ़ एक छाला दे दो ।
 प्रेम में डूबी मीरा का,दर्द मतवाला दे दो ।
मुग्धा के नयनों में प्रीत का
भरा हुआ था सागर,
पुजारिन के नेह ने ,
विषधर मे देखा वंशीधर
 उस जलधि की लहरों का बस एक उछाला दे दो।
प्रेम में डूबी मीरा का,दर्द मतवाला दे दो ।

मीरा को मिला मोहन ,
अपने मोह का क्या होगा
महामिलन की आस लिये,
इस विछोह का क्या होगा ?
मन में लय ,तानें नही, मुझे वंशीवाला दे दो ।
प्रेम में डूबी मीरा का,दर्द मतवाला दे दो ।

8 comments:

  1. पूर्ण समर्पित प्रेम की बहुत बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...हार्दिक शुभ कामनाएँ ...ज्योत्स्ना जी ... :)
    हैप्पी होली .... :)

    सादर
    ज्योत्स्ना

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  2. प्रेम मद छाके, पग परत कहाँ के कहाँ
    सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  3. बहुत ही मनमोहक, पावन, सुन्दर रचना !

    ~प्यार में डूबा हर दिल...एक यही दर्द माँगता है,
    बंसी की सुरीली धुन में...अपनी तान तलाशता है ..~

    आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !!! :-)

    ~सादर
    अनिता ललित

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  4. mujhe aapki yeh rachna aur aapki mataji ki painting bahut hi prabhaavshaali lage !!!!dono hi badhai ke patra hai :)

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  5. कृष्ण प्रेम-भक्ति में सरोबार रचना .....शुभकामनाएं ज्योत्स्ना जी...

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  6. भक्ति रस में डूबी खूबसूरत पंक्तियों के लिए हार्दिक बधाई...|

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  7. himanshu ji ne is rachna ko sthan dekar tatha aap sabhi ne iski pransha kar jo mera utsah badhaya hai uske liye dil se aabhar

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  8. waah jyotsna ji .....bahut khoob .....iss kavita mein meera ki bhakti ne mann moh liya ...painting ka bhi jawaab nahi ......

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