Tuesday, November 26, 2013

आसमाँ में चाँद की तरह



 अनिता ललित
1
चढ़ो ... तो आसमाँ में चाँद की तरह....
कि आँखों में सबकी...बस सको...
ढलो... तो सागर में सूरज की तरह...
कि नज़र में सबकी टिक सको....!
2

काश लौट आए वो बचपन सुहाना...
बिन बात हँसना....
खिलखिलाना...
हर चोट पे जी भर के रोना.......!
3 

बनकर जियो ऐसी मुस्कान...
कि.. हर चेहरे पर खिलकर राज करो.. !
न बनना किसी की... आँख का आँसू..
कि गिर जाओ .. तो फिर उठ न सको...!
4

 दिल की मिट्टी थी नम...
जब तूने रक्खा पाँव...,
अब हस्ती मेरी पथरा गई..
बस! बाकी रहा .. तेरा निशाँ !
5
मुझे पढ़ो......
तो ज़रा सलीके से पढ़ना...
ज़ख़्मों के लहू से लिखी....
अरमानों की ताबीर हूँ मैं...!
-0-
 


Tuesday, November 19, 2013

आँखें




ज्योत्स्ना प्रदीप









1-पिता 

1
तुम्हारे नेत्र 
आँसुओं के लि दो 
वर्जित क्षेत्र ।
2
तुम्हारे चक्षु 
आशीर्वाद दें जैसे 
सात्विक भिक्षु ।
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माँ
1
तेरे नयन 
भरी भीड़ में करें 
मेरा चयन ।
2
तुम्हारे नैन 
बरसात की मानो 
युगल रैन
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3-भाई
1
तेरे लोचन
हैं प्रहरी सजग 
बैरी-सा जग !
2
तेरी निगाहें 
देती सबके बीच 
मौन सलाहें ।
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4-प्रियतम
1
तुम्हारी अक्षि 
चुगे आँसू के मोती
बनके पक्षी ।
2
तुम्हारी आँखें 
भावों -भरी  उड़ान
युगल पाँखें ।
-0-
5-प्रियतमा
1
तुम्हारी दृष्टि 
रच गयी मन में 
हँसती सृष्टि ।
2
सीमन्त रेखा 
फैला अरुणिमा 
तूने जो देखा ।
-0-
6-बेटी
1
तेरी अँखियाँ
पर-पीड़ा को भरें 
चुप से झरें ।
-0-
7-बेटा

ये विलोचन 
भावी सपनों के  हैं
प्रवेश-द्वार
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चित्र:गूगल से साभार