Wednesday, December 4, 2013

नवस्वर

ज्योत्स्ना प्रदीप, जलन्धर
  
श्रीमती विमल शर्मा
मैं
राधा न सही
मीरा न सही                                                
पर क्या मुझे तुम्हारे                            
वंशी-स्वर सुनने का
कुछ हक नहीं ?
तुम तो
बाँस के खोखलेपन को भी
भर देते हो।
छिद्रों को भी तो
स्वर देते हो।
फिर मैं
इतनी खोखली भी नहीं
आओ !
वेणु समझकर ही
अधरों से लगा लो
साँसें भरकर तो देखो
शायद, मुझमें भी
कोई नव-स्वर सुनाई दे।
-0-

कविता के साथ दी गई श्रीमती विमल शर्मा (ज्योत्स्ना प्रदीप की माताश्री) जी  की पेण्टिंग के लिए आभार !

14 comments:

  1. साँसें भरकर तो देखो
    शायद, मुझमें भी
    कोई नव-स्वर सुनाई दे।
    uf kitni sunder panktiyan bahut khoob
    chitr to bahut hi sunder hai aap dono ko badhai
    rachana

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  2. साँसें भरकर तो देखो
    शायद, मुझमें भी
    कोई नव-स्वर सुनाई दे।.....सुंदर अभिव्यक्ति....बधाई

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. वाह ज्योत्सना जी प्रेम की पराकाष्ठा दर्शाती ॥बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति है और पेंटिंग भी लाजवाब ...!!बधाई स्वीकारें .....!!

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  5. बहुत सुन्दर स्वर हैं आपकी कविता के ....बहुत बधाई ज्योत्स्ना प्रदीप जी
    कविता की भावना को सहेजे चित्र भी बहुत मोहक है ...सादर नमन आदरणीया को !
    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

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  6. बहुत सुन्दर कविता ! पेंटिंग भी बहुत सुन्दर .... कविता को पूर्ण करती हुई…
    आपको हार्दिक बधाई !
    सादर नमस्कार .... आदरणीया को !

    ~सादर
    अनिता ललित

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  7. सुन्दर अभिव्यक्ति है .....पर हाँ......

    खोखला बनना होता है,
    वेणु बनने के लिए...
    कान्हा के अधर लगने के लिए ,

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  8. चित्र और रचना दोनों बहुत सुन्दर है. ज्योत्स्ना जी और उनकी माता जी को बधाई.

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  9. प्रेरणात्मक रचना
    बधाई

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  10. मुझे और मेरी माता श्री की पेंटिंग को यहा स्थान देने के लिये हिमांशु जी का हृदय से आभार।

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  11. आप सभी ने मेरे कविता और चित्र की प्रशंसा करके मेरा उत्साह वर्धन किया है,आप सभी का हृदय से आभार।

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  12. kya baat hai jyotsna ji.....hum to aapki kavita k kayal hai...n aapki mataji ki painting bohot hi laajawaab hai !!!

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  13. दिल को छू गयी ये खूबसूरत पंक्तियाँ...साथ ही चित्र भी उतना ही मनमोहक है...| इन दोनों के लिए बहुत बहुत बधाई...|

    प्रियंका

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  14. सुंदर चित्र के साथ बहुत ही सुंदर कविता......ज्योत्सना जी को बहुत-२ बधाई....

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