Sunday, April 28, 2013

उड़ान


रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

बच्चा नहीं चाहता-
छाया: सुशान्त काम्बोज
दीवारों की क़ैद
उसे चाहिए -
खुली खिड़की ,
खुला दरवाज़ा
खुला आसमान
ऊँची उड़ान ;
चिड़ियों के साथ उड़ना
तितलियों के पीछे दौड़ना
कोयल का गीत सुनकर
हुमकना , ठुमकना ।
नहीं चाहिए -
पर्दों वाली खिड़की ,
चाहिए -
नीले सागर- सा फैला
खुला आसमान ।
नहीं चाहिए -
पन्थ
न कोई ग्रन्थ,
उसे चाहिए-
एक पाक शफ़्फ़ाक पन्ना,
जिस पर वह लिख सके
आज़ाद दुनिया की
आज़ाद बातें,
मुस्कानों की सौग़ातें
-0-

14 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर रचना है ... और एक सार्थक सन्देश भी ...

    वर्ना आज कल तो हम सब बच्चों को बिलकुल बोन्साई बना देते हैं ... उनका स्वाभाविक विकास तो कहीं खो गया हो जैसे ... हर क्रिया कलाप पूर्व निर्धारित नापा-तुला .... सब कुछ मानो एक मशीन की तरह चल रहा हो ....

    Manju Mishra
    www.manukavya.wordpress.com

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  2. Bahut sundar prakrtik photo aaya hai or uske saath rachna ne usmen or bhi kitne hi rang bhar dale hain
    aapko is abhivykti ke liye dher saari shubkamnayen...

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  3. baal sulabh komal bhavnaon ka sunder chitran ......
    bahut sunder rachnaa ....!!

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  4. Bahut sundar rachna .sach hai aajkal bachchon ko bachpan men hi bandhan aur baston ka bojh sahna padta hai .

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  5. एक पाक शफ़्फ़ाक पन्ना,
    जिस पर वह लिख सके
    आज़ाद दुनिया की
    आज़ाद बातें,
    मुस्कानों की सौग़ातें.......यह रचना इसलिए भी ज्यादा अच्छी लगी की हमारा हाइकु है इसमे......दादी के साथ....:)

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  6. वाह...बहुत सुंदर...बच्चों को आजादी चाहिए जहाँ उसका स्वाभाविक विकास हो सके|
    ...चित्र बहुत सुंदर...अनंत शुभकामनाएँ !!

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  7. वह चाहे उन्मुक्त उड़ानें

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  8. बहुत प्यारी तस्वीर और कमाल की रचना...शुभकामनाएं।

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  9. क्या बात कही...बिलकुल सही है...| ये तो हम बड़े ही होते हैं जो बच्चों के पंखों को परवाज़ नहीं दे पाते...|
    आभार और बधाई...|

    प्रियंका

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  10. बहुत प्‍यारी तस्‍वीर और कमाल की रचना
    जी उसे ........
    नहीं चाहिए -

    पन्थ

    न कोई ग्रन्थ,

    उसे चाहिए-

    एक पाक शफ़्फ़ाक पन्ना,

    जिस पर वह लिख सके

    आज़ाद दुनिया की

    आज़ाद बातें,

    मुस्कानों की सौग़ातें

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  11. बच्चों का बचपना हम ही छीन लेते हैं. हर बच्चा चाहता है उसकी सोच आज़ाद रहे जहां वह अपने मनचाहे सपनों के साथ उड़ सके. सारगर्भित सन्देश...

    नहीं चाहिए -
    पन्थ
    न कोई ग्रन्थ,
    उसे चाहिए-
    एक पाक शफ़्फ़ाक पन्ना,
    जिस पर वह लिख सके
    आज़ाद दुनिया की
    आज़ाद बातें,
    मुस्कानों की सौग़ातें

    उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई.

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  12. वाह ! कितने सुंदर भाव ! एक बच्चे के दिल तरह पाक श्फ़्फ़ाक !
    प्यारी सी फोटो को भावों के रंगों ने और सुंदर बना दिया है ।
    कविता में इतनी रवानगी है कि पढ़ते हुए शब्दों के संग-संग उड़ने लगे ।

    खुली खिड़की
    पंखेरू सी उड़ान
    नन्ही चाहत ।

    कोरे हैं पन्ने
    एक पाक ग्रन्थ सी
    नन्ही दुनिया ।

    आभार और बधाई !
    हरदीप

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  13. सुन्दर रचना !

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  14. jyotsna sharma07 May, 2013 22:47

    bahut sundar chitr ke saath bahut hii sundar rachanaa ...sachmuch ...bachchaa nahee chaahataa ...
    दीवारों की क़ैद
    उसे चाहिए -
    खुली खिड़की ,
    खुला दरवाज़ा
    खुला आसमान
    ऊँची उड़ान ;
    चिड़ियों के साथ उड़ना
    तितलियों के पीछे दौड़ना
    कोयल का गीत सुनकर
    हुमकना , ठुमकना ।
    नहीं चाहिए -
    पर्दों वाली खिड़की ,
    चाहिए -
    नीले सागर- सा फैला
    खुला आसमान ।...bahut badhaaii evam bahut bahut shubh kaamanaayen ....bachche ko mile unchee udaan ...aur khulaa aasmaan ...hum sar unthhaa kar kahen....aur bulandiyaan paaiye .. :)

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