Friday, April 26, 2013

उड़कर नहीं देखा


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
बीती हुई बातों से बिछुड़कर नहीं देखा ,
क्यूँ पास में थे पंख फिर उड़कर नहीं देखा ।
वो प्यास से तड़पा बहुत ,शहरी गुरूर में ,
था गाँव में पनघट, मगर मुड़कर नहीं देखा ।
कुछ भी कठिन नहीं था,रही इक भूल हमारी ,
बस एक ने भी एक से जुड़कर नहीं देखा ।
बेपर्दगी , गुरबत का दर्द झेलना पड़ा ,
जब पाँव ने चादर में सिकुड़कर नहीं देखा ।
ये नफरतों की आग बुझे भी तो किस तरहा ,
आँखों के समंदर ने निचुड़कर नहीं देखा ।
12-04-2013

15 comments:

  1. जब पाँव ने चादर में सिकुड़कर नहीं देखा ।
    bahut sunder kya baat kahi hai
    badhai
    rachana

    ReplyDelete
  2. ज्योत्स्ना जी .... बहुत ही सुन्दर रचना है .... एक एक पंक्ति, एक एक शब्द जीवन की सच्चाई में डूबा हुआ है. कितना सीधा और सच्चा सा सवाल है .... क्यूँ पास में थे पंख फिर उड़कर नहीं देखा ....

    बेपर्दगी , गुरबत का दर्द झेलना पड़ा ,जब पाँव ने चादर में सिकुड़कर नहीं देखा ... एकदम सच कहा, आजकल कहाँ लोग विश्वास करते हैं चादर के हिसाब से पाँव सिकोड़ने में

    मंजु मिश्रा
    www.manukavya.wordpress.com

    ReplyDelete
  3. वो प्यास से तड़पा बहुत ,शहरी गुरूर में ,
    था गाँव में पनघट, मगर मुड़कर नहीं देखा ।

    Bahut karibi lagi aapki ye panktiyan dil ke bahut kareeb aapko hardik badhai.....

    ReplyDelete
  4. bahut sundar bhav sundar abhivyakti baDHAI jyotsana ji

    ReplyDelete
  5. बेपर्दगी , गुरबत का दर्द झेलना पड़ा ,
    जब पाँव ने चादर में सिकुड़कर नहीं देखा ।
    कमाल की पंक्तियाँ।
    सुन्दर कविता...ज्योत्स्ना जी बहुत बधाई।

    ReplyDelete
  6. वाह, अनुभव कर जानो जीवन को

    ReplyDelete
  7. बेहतरीन...
    क्यूँ पास में थे पंख फिर उड़कर नहीं देखा ।
    सुन्दर और भावपूर्ण..

    सादर
    अनु

    ReplyDelete
  8. पूरी कविता की एक एक पंक्ति दिल को छू लेती है...बहुत सुन्दर...बधाई...|

    प्रियंका

    ReplyDelete
  9. एक-एक पंक्ति दिल को छू गयी !
    बहुत ही खूबसूरत भावों से भरी कविता डॉ ज्योत्स्ना जी !
    ~सादर!!!

    ReplyDelete
  10. Rachanaa ji ,Manju ji ,Dr. Bhawna ji ,Shashi ji ,Krishna ji ,Praveen ji ,Anu ji ,Priyanka ji evam Anita ji ..aapkii sneh bharee sundar pratikriyaa ke liye hriday se aabhaarii hun .
    saadar
    jyotsna sharma

    ReplyDelete
  11. Rachanaa ji ,Manju ji ,Dr. Bhawna ji ,Shashi ji ,Krishna ji ,Praveen ji ,Anu ji ,Priyanka ji evam Anita ji ..aapkii sneh bharee sundar pratikriyaa ke liye hriday se aabhaarii hun .
    saadar
    jyotsna sharma

    ReplyDelete
  12. bahut sundar rachna hai. " vo payas se tadpa bahut shahri gurur mein, gaon mein panghat tha magar mud kar nahi dekha.

    ReplyDelete

  13. beeti hui baaton se..........sundar rachna hai. badhaai

    pushpa mehra

    ReplyDelete
  14. beeti hui baaton se ....... bahut sundar rachna, badhaai

    pushpa mehra

    ReplyDelete
  15. .beeti hui baton se bichur kar nahin dekha
    paas mein the pankh par ud kar nahin dekha

    bahut sundar kya baat hai, badhaai

    pushpa mehra

    ReplyDelete