Sunday, April 21, 2013

सिन्दूरी आसमान


डॉ हरदीप सन्धु 
डॉ ज्योत्स्ना
1.
सुहानी भोर 
सागर की लहरें 
मचाएँ शोर 
2.
भोर की बेला 
चीं -चीं गाए चिड़िया 
मन अकेला 
3.
भोर किरण 
सिन्दूरी आसमान 
मंद पवन 
4.
हँसा सवेरा 
खिड़की से झाँकती 
स्वर्ण रश्मियाँ । 
5.
धीमी पवन 
पँखुरी भरे आहें 
खुशबू मन 
-0-

20 comments:

  1. सुहानी भोर
    सागर की लहरें
    मचाएँ शोर ।

    bahut sunder Hardeep ji ....

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  2. हाइकू की जुबान में अच्छे एहसास बिखेरे हैं ! खूब.....!!

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  3. हर हाइकु लहर की तरह भिगो गया , तरोताजा कर गया , पर ये दो हाइकु तो नायाब है
    हँसा सवेरा
    खिड़की से झाँकती
    स्वर्ण रश्मियाँ ।
    5.
    धीमी पवन
    पँखुरी भरे आहें
    खुशबू मन ।

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  4. सुहानी भोर
    सागर की लहरें
    मचाएँ शोर ।
    2.
    भोर की बेला
    चीं -चीं गाए चिड़िया
    मन अकेला ।
    बहुत हर खूबसूरत प्रकृति का वर्णन और एक गीत की खुशबू । बेतरहीन लय ताल लिए हाइकु। ये है अनुभव की मशाल ।
    हार्द्रि‍क बधाई।

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  5. jyotsna sharma21 April, 2013 20:22


    सुवासित हुआ मन ....

    हँसा सवेरा
    खिड़की से झाँकती
    स्वर्ण रश्मियाँ । ..

    धीमी पवन
    पँखुरी भरे आहें
    खुशबू मन ।.....बधाई आपको ...Hardeep ji !!

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  6. भोर की बेला
    चीं -चीं गाए चिड़िया
    मन अकेला।
    बहुत सुन्दर...हरदीप जी बहुत बधाई।

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  7. वाह .... बहुत खूब

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  8. बहुत सुंदर हाइकू...खूबसूरत शब्द और भाव..

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  9. भोर की बेला
    चीं -चीं गाए चिड़िया
    मन अकेला।

    बहुत सुन्दर हाइकु। बधाई

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  10. Replies
    1. खूबसूरत हाइकू...
      "भोर की बेला
      चीं -चीं गाए चिड़िया
      मन अकेला ।"...बधाई
      डॉ सरस्वती माथुर

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  11. मन मोहित तुकांत हाइकु .
    बधाई .

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  12. भोर का कोलाहल पर मन अकेला... यह भी जीवन का रूप.

    भोर की बेला
    चीं -चीं गाए चिड़िया
    मन अकेला ।

    सभी हाइकु बहुत भावपूर्ण.

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  13. भोर किरण
    सिन्दूरी आसमान
    मंद पवन ।

    बहुत सुन्दर हाइकु ...!!

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  14. आपके दिए स्नेह और सम्मान के लिए मैं बहुत आभारी हूँ ।
    आपका ये अपनापन मुझे लिखने की एक नई शक्ति से भर जाता है ।

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  15. प्रकृति के विविध रंगों को चित्रित करते सुंदर हाइकू ....मीनाक्षी जिजीविषा

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  16. बहुत सुन्दर...
    हँसा सवेरा
    खिड़की से झाँकती
    स्वर्ण रश्मियाँ ।

    किसी तस्वीर की तरह...
    सादर
    अनु

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  17. धीमी पवन
    पँखुरी भरे आहें
    खुशबू मन ।
    बहुत सुन्दर...बधाई...|

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