Tuesday, February 12, 2013

अहसान किए इतने


रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
1
हमसे क्या आज मिले
जग के उपवन में
हम सातों जनम खिले ।
2
काँटों ने घेरा तन
अपनों ने कुचला
फूलों -सा कोमल मन ।
3
हर साँस लगे पहरे
घुटता दम मेरा
तुम भी निर्दय ठहरे ।
4
अहसान किए इतने
नीले अम्बर में
तारे चमके जितने ।
5
तुम मेरी पूजा हो
तुमसे भी प्यारा
कोई ना दूजा हो ।
6
तुम सब दु:ख जानो हो
दिल में दर्द उठे
तुम ही पहचानो हो ।
-0-

14 comments:

  1. तुम मेरी पूजा हो
    तुमसे भी प्यारा
    कोई ना दूजा हो ।

    मर्मस्पर्शी

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  2. काम्बोज जी, आपके सभी माहिया अनुभवों से उपजे हैं
    और दिल से निकले हैं; मर्मस्पर्शी हैं मैं आपसे इतना
    जरूर कहना चाहूँगा, " कोमल मन को जो कुचलें, वे अपने नहीं होते,
    जो खुली आंखों को दिखते, वे सपने नहीं होते।"


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  3. बहुत सुंदर भाव! बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति!:-)
    ~सादर!!!

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  4. आपके सभी माहिया भावपूर्ण हैं।

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  5. अनुभवी कलम से संकोच क्यों .....?

    हम तो आपसे ही सीखते हैं ....

    सभी एक से बढ़कर एक हैं ....पर मोनिका जी की पसंद हमें भी प्रिय लगी ....:))

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  6. गहन ....सुंदर अभिव्यति ...!!
    सादर
    शुभकामनायें .......

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  7. तुम मेरी पूजा हो
    तुमसे भी प्यारा
    कोई ना दूजा हो।
    बहुत खूबसूरत भाव भाव।
    सादर

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  8. हृदय की बात, शब्दों ने कही, भली लगी | सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई |

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  9. तुम सब दु:ख जानो हो
    दिल में दर्द उठे
    तुम ही पहचानो हो ।
    bhaiya koi line nahi ek ek shabd sunder hai ab isi me dekhiye duniya aapki upar ki khushi dekhti hai pr koi apna hi aapke man ko dekhta hai kamal
    saader
    rachana

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  10. सभी माहिया में ह्रदय के गहरे भाव. प्रेम का मीठा रंग और जीवन की तल्खियों का गाढा रंग. बहुत भावपूर्ण, शुभकामनाएँ.

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  11. तुम सब दु:ख जानो हो
    दिल में दर्द उठे
    तुम ही पहचानो हो ।
    बहुत ही सुन्दर...|
    हार्दिक बधाई...|

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  12. काँटों ने घेरा तन
    अपनों ने कुचला
    फूलों -सा कोमल मन

    तुम मेरी पूजा हो
    तुमसे भी प्यारा
    कोई ना दूजा हो ।

    तुम सब दु:ख जानो हो
    दिल में दर्द उठे
    तुम ही पहचानो हो ।

    Bahut gahan or apnepan ki abhivyakti se saje in mahiya ki aapko haardik badhai...aapki lekhni yun hi chamakati rahe...

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  13. बहुत सुंदर भाव!

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