Wednesday, January 23, 2013

तुमको कब पाएँगे ?


रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
1
घर-द्वार सभी छूटा
सपनों-सा पाला
संसार यहाँ लूटा ।
2
आँखों में आ घिरता
चन्दा -सा माथा
अब सपनों में तिरता ।
3
भावों में पलते हो
बस्ती के दीपक !
रजनी भर जलते हो ।
4
सागर तर जाएँगे
पर इतना बोलो-
तुमको कब पाएँगे ?
-0-

18 comments:

  1. बहुत बहुत खूबसूरत भाव व अभिव्यक्ति !
    ~सादर!

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    1. waah bahut sundar hai sabhi ...hardik badhai aapko himanshu ji

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  2. सागर तर जाएँगे
    पर इतना बोलो-
    तुमको कब पाएँगे ?

    क्या बात है .....!!
    जवाब देने की कोशिश .....

    कौन रोक पायेगा
    जन्मों का है मेल
    सजन आओ तो सही

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  3. सागर तर जाएँगे
    पर इतना बोलो-
    तुमको कब पाएँगे ?...बहुत भावपूर्ण

    सादर बधाई !!

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  4. लेखनी ने गागर में सागर भर दिया .

    बधाई .

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  5. सुन्दर भाव बेहतरीन अभिव्यक्ति

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  6. बहुत सुन्दर भावों से परिपूर्ण ,मधुर माहिया ...बहुत बधाई !
    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

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  7. आपके माहिया तो दिल में उतरते चले गए ।
    नि:शब्द कर दिया है । लाजवाब प्रस्तुति !
    बधाई !!

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  8. शशि पाधा25 January, 2013 18:57

    सागर तर जाएँगे

    पर इतना बोलो-

    तुमको कब पाएँगे ?

    वाह! सभी माहिया सुन्दर किन्तु यह विशेष लगा| बधाई|

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  9. सागर तर जाएँगे
    पर इतना बोलो-
    तुमको कब पाएँगे?
    बहुत खूबसूरत भाव। उमदा माहिया..बहुत बधाई।

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  10. सागर तर जाएँगे

    पर इतना बोलो-

    तुमको कब पाएँगे ?
    bhaiya itna sunder bhav ki kya kahun
    घर-द्वार सभी छूटा

    सपनों-सा पाला

    संसार यहाँ लूटा
    uf kitna khoob kaha hai
    bhaiya bahut bahut badhai
    rachana


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  11. अति उत्तम सुन्दर भावों से ओत- प्रोत ,मधुर माहिया ...बहुत आनंद आया ! आपको हार्दिक बधाई !
    - सुभाष लखेड़ा

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  12. सागर तर जाएँगे
    पर इतना बोलो-
    तुमको कब पाएँगे
    वाह भाई साहब क्‍या बात । कितने सुन्‍दर भाव हैं......... हार्दिक बधाई।

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  13. सागर तर जाएँगे
    पर इतना बोलो-
    तुमको कब पाएँगे ?
    दिल को छू गया...| बहुत ही प्यारा लगा...|
    बहुत आभार और बधाई...इतनी खूबसूरत प्रस्तुति के लिए...|
    प्रियंका

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  14. सभी माहिया में गहरे भाव. ये बहुत ख़ास लगा...

    सागर तर जाएँगे
    पर इतना बोलो-
    तुमको कब पाएँगे ?

    इस 'तुमको' में कोई ईश, प्रीत या कोई अपना या सपना... सब शामिल है. बहुत खूब, बधाई भैया.



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  15. घर-द्वार सभी छूटा
    सपनों-सा पाला
    संसार यहाँ लूटा

    Bahut gahan abhivyakti haiसपनों-सा पाला
    संसार यहाँ लूटा bahut achchhi lagi ye upama...bahut2 badhai...

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  16. बेहद अफ़सोस है कि २३ को मैंने जयपुर के लिए उड़ान भरी और आपने यहाँ ये बेहद खूबसूरत माहिया प्रकाशित किए अत: इन्हें बहुत विलंब से पढ़ रही हूँ। हर माहिया भावों की निर्झरिणी है । अत्यंत मनभावन अत्यंत ह्रदयस्पर्शी -

    भावों में पलते हो
    बस्ती के दीपक !
    रजनी भर जलते हो ।

    नमन आपके सृजन और साहित्य साधना को !

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