Tuesday, December 4, 2012

मेला ( गर्भनाल अंक 73)

गर्भनल का पूरा अंक इस लिंक 73 पर पढ़ा जा सकता है ।



6 comments:

  1. मेला उठा .... हर एक के जीवन को कहता हुआ .... दोनों रचनाएँ बहुत अच्छी लगीं ।

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  2. सुधा जी जब भी लिखती हैं कमाल लिखती हैं ।
    शब्दों का सुंदर प्रयोग .......दिल में सीधे उतर जाती हैं उनकी रचनाएँ !
    शुरू से अंत तक पाठक को बाँधकर रखना इनकी कलम का जादू है !
    सुधा जी की कलम को शत-शत नमन !
    हरदीप

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  3. ज्योत्स्ना शर्मा07 December, 2012 18:43

    निर्मल कोमल भावों को बहुत ही सरल शब्दों का कलेवर देती मन को मोह लेने वाली रचनाएँ ..."हम भोली माटी के मासूम से खिलौने "....सादर अभिनन्दन नमन के साथ ...ज्योत्स्ना

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  4. सुधा जी आपको पढना भावों के सागर में डूबना है .आपके ही लिखे शब्दों की पतवार थाम जब उतरती हूँ इस सागर में मन के साथ आत्मा भी तृप्त हो जाती है .मन कहता है इन शब्दों से कभी मेरी कलम में भी उतरा करो
    सादर
    रचना

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  5. Sudha ji ko bahut saari hardik badhai......

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