Wednesday, November 14, 2012

प्यारी गौरैया



डॉ• ज्योत्स्ना शर्मा

नन्हीं प्यारी गौरैया
रोज़ मेरी खिड़की पर करती
फुदक -फुदककर ता-ता -थैया

कितनी सुबह -सुबह जग जाती
तुम मीठे सुर साज़ सजाती
बजे अलार्म भले मेरा
मुझे समय से आन जगाती
तुम ना हो तो फिर पक्का है
कान खिंचें और मारे मैया

छुट्टी के दिन सोने देना
सुख सपनों में खोने देना
देखो बात बढ़ने पाए
बहुत देर मत होने देना
दाना- पानी दूँगी तुमको
मान करूँगी सोन चिरैया
मेरी प्यारी गौरैया
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11 comments:

  1. Bal diwas par Bahut Sunder kavita ...sunder prastuty ...Badhaaee!
    Dr Saraswati Mathur

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  2. वैसे अब गौरैया कम दिखाई पड़ती हैं, पर यह सुन्दर रचना कितना कुछ याद दिला गई...। बधाई...।

    प्रियंका

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  3. ज्योत्स्ना जी बहुत प्यारा बाल-गीत।

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  4. ज्योत्स्ना जी बहुत प्यारा बाल-गीत।

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  5. arewah kya hi sunder bal geet hai bachchon ko to bahut hi pyara lagega jab mujhe itna achchha lag raha hai
    rachana

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  6. प्यारी सी गौरया का प्यारा सा गीत..

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  7. बहुत प्यारी मीठी-मीठी रचना, बधाई ज्योत्सना जी.

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  8. बहुत प्यारी रचना बाल दिवस पर ... ओ मेरी सों चिरैया ..

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  9. ज्योत्स्ना शर्मा24 November, 2012 17:23

    प्रस्तुति पर सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभार आप सभी का ..Dr Saraswati Mathur जी ,manukavya ji ,Krishna ji ,Rachana ji ,प्रियंका जी ,प्रवीण पाण्डेय जी ,डॉ. जेन्नी शबनम जी एवं डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति जी ...सादर ज्योत्स्ना

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