Saturday, June 30, 2012

हाइकु मुक्तक


हाइकु मुक्तक-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
1
यादों की गली /यदि भूलकर भी /तुम आ जाते ।
 इन्तज़ार में  / मोड़ पर खड़े थे / हमें पा जाते ॥
करें क्या हम /क़िस्मत  में लिखा जो / मिटता नहीं ।
कसक यही / दो पल को ही सही / तुम्हें पा जाते ॥
2
अपना तन । अपना मन सब  / तुमने जाना ।
इसके आगे / होती इक दुनिया /न पहचाना ॥
हँसता देख / किसी को पलभर /तुम तो रोए ।
उम्र बिता दी / स्वार्थ को  ही तुमने / जीवन माना ॥
-0-

7 comments:

  1. बँधा भी है और मुक्त भी, अर्थ और भाव पूर्ण..

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  2. हृदय की कसक को सुंदर शब्द दिये ...
    अच्छी रचना ...!!शुभकामनायें

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  3. बढ़िया हाइकु मुक्तक .... सुंदर भाव

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  4. भावपूर्ण अच्छी रचना !!

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  5. सरल शब्दों में मन को टटोलती ..छूती हुई रचनाएँ.

    शुभकामनायें.

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  6. ज्योत्स्ना शर्मा10 July, 2012 12:15

    सुंदर भावों को मोतियों सा पिरो के ये तो माला जैसे हो गये ...बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ...
    सादर ज्योत्स्ना

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