Thursday, March 8, 2012

मेरे सूरज (चोका )


रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

मेरे सूरज
बादल तो आएँगे
घुमड़कर
अम्बर में छाएँगे
रोकें उजाला
तुम्हें सहना होगा
लहर बन
चट्टानों से टकरा
बहना होगा
पीछे नहीं मुड़ना
दूर है जाना
अँधेरे भँवर से
न घबराना
सागर तक जाना
आँसू पोंछके
डुबकी  है लगाना
मोती बटोर लाना  ।
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9 comments:

  1. रोकें उजाला
    तुम्हें सहना होगा
    लहर बन
    चट्टानों से टकरा
    बहना होगा...Bahut positive soch ubharkar aati hai in panktiyon ko padhkar ...bahut hi gahri abhivykti hai ye...bahut2 badhai...

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  2. अँधेरे भँवर से
    न घबराना
    सागर तक जाना
    आँसू पोंछके
    डुबकी है लगाना
    मोती बटोर लाना ।

    सकारात्मक संदेश देती बहुत सुंदर रचना है सर...बहुत२ बधाई|

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  3. गहरे उतर ही मोती मिलते हैं..

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  4. सागर तक जाना
    आँसू पोंछके
    डुबकी है लगाना
    मोती बटोर लाना

    बहुत सुंदर जज्बा ...
    सकारात्मकता से लबरेज ...

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  5. आदरणीय रामेश्वर जी ,
    यह चोका सुनकर तो मरता हुआ बन्दा भी उठ खड़ा हो जाए |
    वाह क्या कला है आपकी बात कहने की ...अनोखा अंदाज़ जो बहुत ही कम मिलता है |
    सरल भाषा और गहरी बात जो हर किसी के दिल में उतर जाए !
    लहर बन
    चट्टानों से टकरा
    बहना होगा
    पीछे नहीं मुड़ना
    दूर है जाना
    अँधेरे भँवर से
    न घबराना
    जब कोई इतने प्यार से व पीठ थपथपाकर हौसला दे तो चट्टानों की क्या मजाल कि वो रास्ता रोकें !
    आपका चोका पढ़कर इसी प्रभाव को मैंने एक चोका ( मेरा वजूद ) में बताने का प्रयास किया है ....कितनी सफल हुई ये तो मेरे लिंक शब्दों का उजाला (http://shabdonkaujala.blogspot.com) पढ़कर ही पता चल सकता है |
    आपकी कलम को सलाम !
    हरदीप

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  6. सकारात्मक सोच की झलक दिखाती बहुत सुन्दर रचना ...

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  7. prerak aur sakaaratmak sandesh...

    रोकें उजाला
    तुम्हें सहना होगा
    लहर बन
    चट्टानों से टकरा
    बहना होगा
    पीछे नहीं मुड़ना
    दूर है जाना

    aatmvishwaas aur chetna jagaati arthpurn rachna ke liye badhai sweekaaren.

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  8. बादल तो आएँगे
    घुमड़कर
    अम्बर में छाएँगे
    रोकें उजाला
    तुम्हें सहना होगा
    लहर बन
    चट्टानों से टकरा
    बहना होगा
    पीछे नहीं मुड़ना
    दूर है जाना

    बहुत सुंदर भाव हैं
    सादर,
    अमिता कौंडल

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  9. बहना होगा
    पीछे नहीं मुड़ना
    दूर है जाना
    अँधेरे भँवर से
    न घबराना
    सागर तक जाना
    kya baat hai shabdon ki tokri me bhavon ko bharna koi aapse sikhe
    saader
    rachana

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