Wednesday, November 9, 2011

मेरे आँगन उतरी सोनपरी [चोका ]


मेरे आँगन उतरी सोनपरी
-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

मेरे आँगन
उतरी सोनपरी
लिये हाथ में
वह कनकछरी
अर्धमुद्रित
उसकी हैं पलकें
अधरों पर
मधुघट छलके
कोमल पग
हैं जादू-भरे डग
मुदित मन
हो उठा सारा जग
नत काँधों पे
बिखरी हैं अलकें
वो आई तो
आँगन भी चहका
खुशबू फैली
हर कोना महका
देखे दुनिया
बाजी थी पैंजनियाँ
ठुमक चली
ज्यों नदिया में तरी
सबकी सोनपरी ।
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21 comments:

  1. सोनपरी को ढेरों शुभकामनाएँ... :)

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  2. सहज स्वीकार !आपका यह हार्दिक प्यार !

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  3. हाथों में लिये
    जादू की नन्ही छड़ी
    सितारों जड़ी
    लो आई सोन परी
    .छूना ना कोई
    उजरी निखरी है।
    हो ना वो मैली.
    है निर्मल कोमल
    ये सोनपरी
    सपने अपने- से
    .मुट्ठी में भरे ,
    अधखुली अँखियाँ,
    मुसकाई है
    जाने क्यों निंदिया में
    दुलारी ये सोनपरी ..।

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  4. इस सोन परी पर तो बहुत प्यार आ रहा...। ममता से पगी इस रचना के लिए मेरी बधाई...।
    सदर,
    प्रियंका

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  5. नन्ही परी की ढेरो शुभकामनायें ....

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  6. सोनपरी के आगन में उतरने के लिए ढेरों बधाईयाँ और शुभकामनाये.
    अर्धमुद्रित
    उसकी हैं पलकें
    अधरों पर
    मधुघट छलके
    कोमल पग
    बहुत सुंदर प्यारी रचना है बधाईयाँ.
    सादर,
    अमिता

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  7. वो आई तो
    आँगन भी चहका
    खुशबू फैली
    हर कोना महका

    ईश्वर करे सोनपरी की सुनहरी आभा बिखरी रहे...आँगन सदा चहकता और महकता रहे..बधाई एवं शुभकामनाएँ|

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  8. Congratulations and hearty welcome to the son pari.

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  9. सोनपरी के जन्म पर ढेरों शुभकामनाएँ !
    दादा -दादी की दुलारी ......
    माता -पिता की प्यारी .....नन्ही सोनपरी को बहुत सा प्यार !
    कितना सुन्दर तोहफा मिला है हमारी सोनपरी को ...दादा के दिल में पगता मोह शब्द बनकार इस रचना में उतरा है !

    हरदीप

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  10. नन्हीं सोनपरी ने जब धरती पर आकर आँखे खोली सभी परिवार जनों के चेहरों पर खुशियों की लहर दौड़ी दद्दू ने तो नन्हीं परी के लिए फटाफट प्यारी सी रचना भी रच डाली,जिसमें उमड़ा है दद्दू का अथाह स्नेह,दादी की ममता,माँ का वात्स्ल्य और पिता का दुलार।
    नन्हीं सी परी के लिए हमारी ओर से ढेरों ढेरों रों रों रों शुभकामनाओं के साथ इस धरती पर स्वागत है...

    काम्बोज जी के समस्त परिवार को भावना की ओर से हार्दिक अनगिनत बधाईयाँ...

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  11. दाद जी बन
    हिमांशु जी प्रसन्न
    दादी भी खुश
    पाई जो नन्ही परी
    छोटे से हाथ
    गुलाबी पंखुड़ियाँ
    मन को मोहे
    अधरों में कियाँ की
    मीठी आवाज
    माँ की नर्म गोद में
    परी मुस्काई
    नई दुनिया भाई
    माँ पिता संग
    बाबा दादी को देख
    मन हर्षाया
    प्रभु को यहीं पाया
    धन्य हुई मै
    आपकी गोद पा के
    स्नेह जल से
    खुद को भीगा कर
    पिंक रंग से
    कमरे को सजाना
    गुलाबी ड्रेस
    मुझको पहनना
    थोड़ी बड़ी हो
    सबको भगाऊँगी
    दादा को घोडा
    पापा को बना हाथी
    करूँ सवारी
    सपनो से भरी है
    बंद मुट्ठी
    मेरे कुछ आपके
    भर दूंगी मै
    घर में घडकन
    नन्हे पैरों से
    जन्म देने के लिए
    शत शत नमन
    aapko bahut bahut badhai
    saader
    rachana

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  12. कितनी प्यारी
    आई राजदुलारी
    दादी चहके
    दादा बोले ह़ँसके
    ये मेरी 'सोनपरी'|

    नव जीवन
    का,करके सृजन
    माँ है हर्षित
    पाए नन्हीं गुड़िया
    पिता का आलिंगन|

    जग ने जाना
    सोनपरी का आना
    झूमी धरती
    खिला है उपवन
    बसी सबके मन|
    ऋता

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  13. तुम
    भोर का सूरज,
    तुम आयीं तो
    तुम्हारे साथ
    ज़िंदगी की सुबह आई !

    तुम
    एक नन्हा सा फ़रिश्ता
    तम्हे गोद में ले कर,
    माँ-पापा , दादा-दादी
    सब के अरमान
    हुये पूरे !

    तुम
    वक़्त के हाथों मिला हुआ
    एक ख़ूबसूरत तोहफा,
    तुम्हारे आने से
    ज़िंदगी सज गयी

    बेटियां तो भोर का सूरज होती हैं, उनके आने से जीवन में ख़ुशी की धूप भर जाती है. रामेश्वर जी आप को एवं सम्पूर्ण परिवार को परी की आमद पर बहुत बहुत बधाई... बिटिया को जीवन में सदैव सर्वश्रेष्ठ ही मिले ऐसी कामना है... हार्दिक स्नेह सहित
    सादर
    मंजु

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  14. रामेश्वर भाई आपको बधाई
    खुशियाँ लाई
    लक्ष्मी घर में आई
    तुम्हें बधाई
    *
    लाड़ो का आना
    दादा औ दादीजी ने
    पावन माना
    *
    आप भी खाओ
    मोतीचूर के लड्डू
    हमें खिलाओ
    बहुत शुभकामनाओं के साथ
    देवी नगरानी

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  15. bahut pyaari aur komal kavita. sundar shabd sanchayan, badhai.

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  16. सोनपुरी सदा ही यूँ ही आनन्द बरसाती रहे।

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  17. दादा की गोद
    पौत्री की किलकारी
    स्वर्णिम पल
    हाइकु चोका ताँका
    आशीर्वादों का ताँता|

    बधाई और शुभकामनाएँ|

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  18. बहुत सुन्दर सोनपरी ऐसे ही हर आँगन घर उतरे और खुशियाँ बिखेरे ..सुन्दर
    भ्रमर ५
    वो आई तो
    आँगन भी चहका
    खुशबू फैली
    हर कोना महका
    देखे दुनिया

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  19. सोनपरी को ढेर सारा प्यार और शुभकामनाएं... दादा दादी जी को बधाईयां

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