Tuesday, September 6, 2011

होम कर दी (हाइकु गीत)


-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

ईर्ष्या का कुण्ड
लील गया सारी ही
सद्भावनाएँ ।

होम कर दी
हैं शुभकामनाएँ
प्यारी ॠचाएँ ।

दे दी आहुति
वाणी के संयम की
दो ही पल में,
पिला दिया ज्यों
दूध , मिलाकर के
हलाहल में;

घृणा का घृत
निर्मम चषक में
भर ही लाए ।

यज्ञ किया है
किस सुख के लिए ?
नहीं है पता,
मरता मन
शाप देकर और
करता ख़ता ;

उठेगा धूम -
गीली जो समिधाएँ
संग हवाएँ ।

अशुद्ध मन्त्र-
कुसमय  का पाठ
भारी पड़ता,
दुख ही देगा
भूल -शूल चुभके
जब गड़ता;

मन -अश्व  को
न रोकती बल्गाएँ
न वर्जनाएँ ।

आग लहकी
पुरोहित झुलसे
यजमान भी
नफ़रतों ने
भस्मीभूत किए हैं
सामगान भी

अहित सोच
जीवित रह पाती
न  प्रार्थनाएँ
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12 comments:

  1. geet si lay hai haiku ke niyam hai aapke shabd hai .bhavnaon ki udan hai aur kya chahiye kisi pathak ko gadgad hone ke liye sunder ati sunder
    saader
    rachana

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  2. अद्भुत प्रयोग...हाईकु के माध्यम से गीत संरचना का...बधाई.

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  3. अच्छा है गीत। दो-दो हाइकु के बन्द बनाकर गीत की तकनीक का निर्वाह अच्छा बन पड़ा है। भाव तो हैं ही, वैचारिक स्तर पर भी भरपूर ऊर्जा है इस गीत में।

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  4. विषय अच्छा है..ईर्ष्या और नफ़रत से बुरी कोइ चीज नहीं होती..सभी हाइकु बहुत अच्छे हैं|इस विषय पर मेरे भी दो हाइकु...
    अकारण ही/उपजती है ईर्ष्या/जड़ से काटें
    ईर्ष्या-अग्नि में/दूसरों को जलाते/स्वयं जलते

    सादर
    ऋता

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  5. home kar dii -haiku geet eak gahan abhivayakti hai

    नफ़रतों ने
    भस्मीभूत किए हैं
    सामगान भी

    अहित सोच
    जीवित रह पाती
    न प्रार्थनाएँ

    ekadm sach ki chasni men page hain haiku....kisi ka ahit soch bahla hua kabhi kisi ..nahi kabhi bhi nahi...gahre chintan ke liye hardik shubkamnayen..

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  6. रामेश्वर जी ,
    होम कर दी हाइकु गीत साहित्य का उत्तम नमूना है | बहुत ही गहरे विचार .....दुनिया के सच को उजागर करते हुए हाइकु ......ऐसे शब्दों में बाँधना तो कोई रामेश्वर जी से सीखे !
    ऐसी कलम को झुककर सलाम !
    हरदीप

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  7. अहित सोच
    जीवित रह पाती
    न प्रार्थनाएँ ।

    गहरे भाव लिए सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे..आपकी हर रचना अच्छी सीख दे जाती है..हार्दिक शुभकामनाएँ|
    सादर
    ऋता

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  8. जीवन यज्ञ में न जाने कितनी आहुतियाँ दी जानी हैं।

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  9. वास्तव में भूल शूल बनकर चुभता है
    उससे बचने का कोई उपाय नही
    अच्छी प्रस्तुती।मेरे ब्लाँग पर आने
    के लिये धन्यवाद।

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  10. आपने नवीन प्रयोग करके एक नयी विधा को जन्म दिया है. बहुत की अच्छा तथा सुंदर हाइकु गीत है. अन्य रचनाकार भी इसका अनुसरण करेंगे.
    उमेश मोहन धवन
    कानपुर

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  11. ईर्ष्या का कुण्ड
    लील गया सारी ही
    सद्भावनाएँ ।
    अहित सोच
    जीवित रह पाती
    न प्रार्थनाएँ ।
    क्‍या क्‍या बात । क्‍या खूब कहते हैं । संवेदना के सभी तार झंकृत कर दिये । गहन सोच ।धन्‍यवाद अभिव्‍यक्ति को जिस के जरिए मैं आप तक पंहुची ।धन्‍यवाद उमेश महादोशी जी को ।
    मैं पहले क्‍यों अन्‍जान थी।
    बधाई

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  12. sabhi haaiku bahut sundar. geet ke roop mein bahut achchhe lage haaiku. gahre bhaav, prerak shabd aur shikshaprad vichaar. bahut badhaai aur shubhkaamnaayen Kamboj bhai.

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