Monday, July 25, 2011

सूरज अभी निकला है



रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

जीने के लाखों हैं , मरने के हज़ारों हैं
सूरज अभी निकला है ,क्यों सोचें मरने की ।
जीवन के द्वारे पर ,कभी भीख नहीं माँगी
गर मौत भी आ जाए ,ये बात न डरने की ।
क्या उनको समझाना , जो अक्ल के दुश्मन हैं
नहीं सोचें कभी बातें ,उनको खुश करने की ।
जिस देश न जाना था , वह बाट नहीं पकड़ी
हमने ना कभी सोची, रीता घट भरने की
जिनके सन्देशों ने ,जीवन था दिया हमको
बख़्शीश उन्हें क्यों दें , बीहड़ में विचरने की ।
जीने की तमन्ना है कि  मरने नहीं देती
उनकी  तो रही फ़ितरत  अंगारे  धरने की ।
-0-
[चित्र गूगल से साभार]

14 comments:

  1. क्या उनको समझाना , जो अक्ल के दुश्मन हैं
    नहीं सोचें कभी बातें ,उनको खुश करने की ।
    bhaiya kya bat hai ye to sahi kaha
    humko jante hain aese bahut log hain.
    जिनके सन्देशों ने ,जीवन था दिया हमको
    बख़्शीश उन्हें क्यों दें , बीहड़ में विचरने की
    kash ke sabhi log aesa sochte hum sabse jyada apno ko hi dukh dete hain.
    bhaiya kamal hai .bahut hi sunder
    saader
    rachana

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  2. सूरज अभी निकला है ,क्यों सोचे मरने की

    रामेश्वर जी, बहुत सकारात्मक और सार्थक सन्देश है.....

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  3. जीने का हौसला बढाती रचना...

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  4. बहुत सही कहा है अंकल जी, अक्ल के दुश्मनों को कुछ समझाने की कोशिश करना, मतलब अपना ही सिर फोड़ना...।
    एक खूबसूरत रचना हमें पढ़वाने के लिए आभार...।

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  5. उत्साह बिखेरती कविता।

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  6. जीवन के द्वारे पर ,कभी भीख नहीं माँगी
    गर मौत भी आ जाए ,ये बात न डरने की ।
    क्या उनको समझाना , जो अक्ल के दुश्मन हैं
    नहीं सोचें कभी बातें ,उनको खुश करने की ।
    वाह! बहुत खूब लिखा है आपने! सुन्दर सन्देश देती हुई लाजवाब रचना!

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  7. बहुत खूब कहा रामेश्वर जी आपने.....
    जीने की तमन्ना है कि मरने नहीं देती
    उनकी तो रही फ़ितरत अंगारे धरने की ..........
    *******

    जानते हैं वो इन अंगारों की तपन
    झेलतें हैं जो इनको यूँ नित दिन
    अंगारों को ही मानते हैं वो जीवन
    बिन तपे सोना कभी बने न कुंदन !

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  8. जीवन के द्वारे पर ,कभी भीख नहीं माँगी
    गर मौत भी आ जाए ,ये बात न डरने की ।
    क्या उनको समझाना , जो अक्ल के दुश्मन हैं
    नहीं सोचें कभी बातें ,उनको खुश करने की ।
    जिस देश न जाना था , वह बाट नहीं पकड़ी


    बहुत खूब ...उम्दा लेखनी

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  9. विषमताओं में भी जीवन जीने का संदेश देती सार्थक रचना...

    बहुत अच्छी लगी,

    सादर
    ऋता

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  10. दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा
    जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा

    Your lines are inspiring for those people
    who faces odd situation
    You know your delightful lines are source
    of inspiration.
    With regards

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  11. लोगों की फितरत तो दूजों की राहों में कांटे ही बिछाने की होती है। पर चलने वाले चलते ही रहते हैं और अपनी मंजिल पाकर ही दम लेते हैं… प्रेरणाप्रद रचना…

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  12. Respected Bhai Sahab,
    Jeevan ke sabhi angaaron ko paar kar aage barhne ka hausla barhati, bahut saarthak rachna.

    With regards.

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  13. sandeshprad rachna...
    जीने की तमन्ना है कि मरने नहीं देती
    उनकी तो रही फ़ितरत अंगारे धरने की ।

    bahut saarthak aur ullas badhati rachna, badhai sweekaaren.

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