Sunday, April 10, 2011

बची है आस-


रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
1
तेरी दुआएँ
महसूसती मेरी
रक्त -शिराएँ
2
ओस की बूँद -
बरौनियों की नोक
उलझे आँसू
3
तुम्हारा मन
व्याकुल क्रौंच जैसा
करे क्रन्दन
4
बची है आस-
कभी न कभी तुम
आओगे पास
5


गए हो दूर

यादों का रात-दिन
जलता तूर1


6
तुम्हारी भेंट
रख ली सँजोकर
प्राण हों जैसे
7
सपना टूटा
हाथ जो गहा था
हमसे छूटा
8
सपने बाँटे-
जितने थे गुलाबी,
बचे हैं काँटे
9
फूल हैं झरे
सपने सब मरे
साँझ हो गई
-0-


1 -एक पर्वत जिस पर दिव्य प्रकाश देखकर हज़रत मूसा मूर्च्छित हो गए थे  ।






16 comments:

  1. लगता है बहुत कुछ छूट गया पढने से। लाजवाब हाईकु हैं। इतने दिन नेट से दूर रही। काम इतना इकट्ठा हो गया कि समझ नही आ रही कहाँ से शुरू करूँ। आपकी पुस्तकें मिल गयी बहुत बहुत धन्यवाद मुझे भी इस पुस्तक मे शामिल किया। अभी कल वापिस आयी हूँ पढती हूँ उसे। आपके हाईकु पढ कर बहुत कुछ सीखने को मिलता है। धन्यवाद भाई साहिब इस विधा से परिचय करवाने के लिये\

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  2. काव्यात्मक संवेदना से भरपूर बेहद सधे हुए हाइकु… आपके हाइकु पढ़कर अच्छे हाइकु लिखने की प्रेरणा मिलती है।

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  3. रमेश्वर जी
    आपको पढ्कर लगता है मानो कोई अम्रित रस पिला रहा हो !
    आप शब्दों की ऐसी माला पिरोते हैं कि हर कोई बँधा चला जाता है
    सपने बाँटे-
    जितने थे गुलाबी,
    बचे हैं काँटे

    आप गुलाबी सपने बाँट्ते ज़रूर हैं लेकिन आप याकीन माने ... आपके पास काँटे नहीं फ़ूल खिलते हैं ...जिन की खुशबू देश-विदेश मैं हर दिन फैला करती है.. आप के हाइकु पढ्कर बहुत कुछ सीखने को मिलता है! दुआ करती हूँ कि आप की कलम ऐसे ही हमारा मार्ग दर्शन करती रहे!

    हरदीप

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  4. सपना टूटा
    हाथ जो गहा था
    हमसे छूटा

    Bahut Sunder Hain saare Haiku...

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  5. me hardeep ji ki baat se puri tarah sahmat hoon.
    aap sabhi ke kiye ful khilate hain.aapke haiku anmol hain .mene to aap se hi sikha hai.aur abhi sikh hi rahi hoon .
    samvednaon ko shbd dena aap ko khoob aata hai aapke prtyek haiku me yahi baat dekhne ko milti hai .lajavab haiku hain
    bahut bahut badhai
    saader
    rachana

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  6. तुम्हारी भेंट
    रख ली सँजोकर
    प्राण हों जैसे
    lazvab
    ek se badhkar ek hai sare haaiku

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  7. ओस की बूँद -
    बरौनियों की नोक
    उलझे आँसू

    सपने बाँटे-
    जितने थे गुलाबी,
    बचे हैं काँटे

    सच में, न जाने कितनो को सपने बाँट दिए आपने...पर काँटें नहीं, ईश्वर हमेशा आपको फूलों से, उसकी महक से परिपूर्ण रखेगा...।
    हम सब की यही दुआ है ।

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  8. फूल हैं झरे
    सपने सब मरे
    साँझ हो गई
    Bahut khubsurat haikoo hai ye...yun to sabhi haikoo eaksebadhkar eak hai..eak chitr puri kahnai ka saamne ubharta hua prateet hota hai in haikooun se...bahut2 badhai..

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  9. बहुत भावुक कर देने वाले हाइकू ... रामेश्वर जी इन्हें शेयर करने के लिए धन्यवाद... कल आपकी यह पोस्ट चर्चामंच पर होगी ... आप वह भी आ कर अनुग्रहित करें ,,,

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  10. उम्दा हाईकू..

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  11. सपने बाँटे-
    जितने थे गुलाबी,
    बचे हैं काँटे.... badhiyaa

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  12. ओस की बूँद -
    बरौनियों की नोक
    उलझे आँसू

    6
    तुम्हारी भेंट
    रख ली सँजोकर
    प्राण हों जैसे..
    सारी हाईकू एक से बढ़ कर एक ...गहन और संवेदनशील ..

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  13. सारे हाइकू याद रखने लायक हैं विशेषकर --ओस की बूँद ,सपने बाँटे..,सपना टूटा आदि । इतने भावपूर्ण हाइकू पढकर अच्छा लगा ।

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  14. एक से बढ़ कर एक ...गहन और संवेदनशील ..

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  15. sabhi haaiku mann ko gahre chhu liye hon jaise, bahut bhaavpurn aur gahree samvednaayen, badhai kamboj bhai.

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