Thursday, April 7, 2011

जीत के आँसू ( टीम इण्डिया)


रोक न सके
सैलाब -से बहते
खुशी के आँसू                                 -रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'                                            

7 comments:

  1. ज्यादा खुशी में भी आँखें बरबस भीग जाया करती हैं… वे खुशी के आँसू होते हैं… रोकने पर भी नहीं रुकते। आपका हाइकु बहुत सटीक प्रतीत होता है।

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  2. vastvik varnan...sajeev chitr nannhe se haikoo men...

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  3. poore desh ki aankhen bheeg gayin thin in khushi ke anshuon se....Sunder haiku

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  4. आँसुओं की भी अजीब कहानी है !दुःख में तो आते ही हैं ज्यादा ख़ुशी होने पर भी निकल आते हैं !
    वह मौका ही ऐसा था ,जज्बात पर काबू पाना बहुत मुश्किल था !

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  5. ये आँसू बड़े मीठे थे...खारापन तो था ही नहीं...।

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  6. बहुत बढ़िया...

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  7. aadarniy sir
    aapne to kamaal kar diya.
    is chhote se haiiku me sabke man ki baat kah di.
    waqai bhatat ki is jeet ne sbki aankho me khushi ke aansu la diye.
    bahut bahut badhai
    sadar pranaam
    poonam

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