Monday, January 17, 2011

बर्फ़ीला मौसम

डॉ सुधा गुप्ता
1
दिन चढ़ा है
शीत -डरा सूरज
सोया पड़ा है
2
झाँका सूरज
दुबक रज़ाई में
फिर सो गया
3
हरे थे खेत
 पोशाक बदल के
हो गए श्वेत
4
बर्फ़ीली भोर
पाले ने नहलाया
पेड़ काँपते
5
दानी सूरज
सुबह से बाँटता
शॉल- दोशाले
6
पौष की भोर
कोहरा थानेदार
सूर्य फ़रार                                                                                  -0-                                                                                           डॉ सुधा गुप्ता जी के और अधिक हाइकु अनुभूति  पर पढ़ें 

14 comments:

  1. झाँका सूरज
    दुबक रज़ाई में
    फिर सो गया
    padh kr thand ka ahsas ho gaya
    हरे थे खेत
    पोशाक बदल के
    हो गए श्वेत
    sajeev chitran
    पौष की भोर
    कोहरा थानेदार
    सूर्य फ़रार
    thand me suraj ko sabhi khojte hain .pr garmi me?
    aap ke har hayku pr likhna chahti hoon sabhi sunder hai .aap ko padhna hamesha achchha lagta hai
    saader
    rachana

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  2. बहुत खूबसूरत हाइकू हैं...। सूरज का छिपना तो सभी कह देते हैं पर सूर्य फ़रार...कमाल है...।
    सच में सारे हाइकु पढ़ कर आनन्द आ गया । इतनी सुन्दर रचनाओं के लिए सुधा जी बधाई की पात्र तो हैं ही , पर उन्हें हमें पढ़ाने के लिए आप का भी धन्यवाद...।

    प्रियंका गुप्ता

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  3. itni achi upmayen sudha ji hi de sakti han...bahut2 aabhar..sudha ji ko hardik badhai

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  4. दानी सूरज
    सुबह से बाँटता
    शाल दोशाले
    वाह सुन्दर बिम्ब
    पौश की भोर
    कोहरा थानेदार
    सूरज फरार
    वाह बहुत खूब सभी हाईकु एक से बढ कर एक है। सुधाजी को बधाई।

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  5. बहुत बढिया हाइकू।

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  6. वाह ! एक से बढ़कर एक हाइकू ! बधाई !

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  7. काफी प्रयास करना पड़ा होगा लेखिका को इन्हें लिखने के लिये क्योंकि पढ़ने से अप्रयासित(स्वाभाविक)लग रहे हैं ये हाइकू. यही रचनाकार की सफलता है.

    उमेश मोहन धवन

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  8. मौसम के अनुकूल हैं हाइकू भी .बहुत अच्छे.

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  9. sabhi haaiku is khaas mausam ko supurd, bahut badhiya, badhai.

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  10. बर्फ़ीली भोर
    पाले ने नहलाया
    पेड़ काँपते
    yahan New jersey ki barfeele mausam mein kuch kampkampahat jodne ke liye aapka sashkt vivaran bahut hi accha laga.

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  11. सुधा जी के सभी हाइकू हमेशा की तरह भाव और भाषा के सौंदर्य का प्रतिरूप हैं. "दानी सूरज" और "सूरज फरार"... दोनों ही प्रयोग अप्रतिम हैं... प्रकृति का बेजोड़ चित्रण सुधा जी की विशेषता है .... चाहे "मेघ बाराती हों और आकाश मंडप" हो या "बादलों की पतंग उड़ती हो " या फिर "नींद में पेड़ को कली का सपना आये" सब एक से बढ़ कर एक अनूठी कल्पनाएँ हैं.
    मंजु

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