Wednesday, January 5, 2011

भर-भर गागर देना ।

-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’
दो बूँद भी
प्यार मिला है
मुझको जिनसे
उनको
भर-भर गागर देना ।
सुख-दु:ख में
जो  साथ रहे
परछाई बन
सुख के
सातों सागर देना ।
बोते रहे
हरदम काँटे
प्यार-भरे दिल
तोड़े
उनको भी समझाना ।
फूल खिलाते
रहे जो भी
सपनों में भी
उनको
हरदम गले लगाना।
-0-

11 comments:

  1. रामेश्वर जी,
    दिल को छूने वाली है आपकी कविता....
    हर शब्द दिल में उतरता चला गया ।
    आपके ही भाव को अगर हम कुछ ऐसे कहें...
    1.
    प्यार तेरे की
    मिली जो बूँद-बूँद
    गागर भरी !

    2.
    जीवन भर
    बना परछाईं तू
    दु:ख सुख में!

    3.
    बोए जो काँटे
    कर माफ़ उनको
    गले लगाना!
    4.
    गले लगाऊँ
    मेरे जो हैं अपने
    सपनों में भी !

    हरदीप

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  2. प्रेम भरी भावनाओँ से पगी रचना बहुत अच्छी लगी.

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  3. मन को छूती , सहज ,अछूती रचना के लिए मेरी बधाई बड़े भाई ।

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  4. Happy New Year Rameshwar ji. Bahut sunder rachna hai !

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  5. हृदयस्पर्शी रचना।

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  6. Respected Bhai Sahab,
    Bahut sundar aur dil ko chhoone wali kavita hai.

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  7. ज़िन्दगी से जुड़ी यह कविता पढ़ कर बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हुई...।
    इतनी खूबसूरत कविता के लिए बहुत-बहुत बधाई...।

    मानी

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  8. बहुत सुन्दर और सकारात्मक सोच, इतना प्यार जिस ह्रदय में हो उसके लिए सारा विश्व अपना है वाह सारे विश्व का !!

    दो बूँद भी
    प्यार मिला है
    मुझको जिनसे
    उनको
    भर-भर गागर देना ।
    सुख-दु:ख में
    जो साथ रहे
    परछाई बन
    सुख के
    सातों सागर देना ।
    बोते रहे
    हरदम काँटे
    प्यार-भरे दिल
    तोड़े
    उनको भी समझाना

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  9. दिल से निकली हुयी निर्मल प्रार्थना है आपकि यह सुन्दर कविता
    उमेश मोहन धवन

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