Saturday, October 9, 2010

काम्बोज जी दिल्ली से अब सिडनी में ...

ऑस्ट्रेलिया सिडनी से प्रथम बार प्रकाशित हिन्दी पत्रिका "हिन्दी गौरव" का प्रथम अंक २ अक्तूबर को सामने आया, जिसमें काम्बोज जी की लघु कथा "चक्रव्यूह" भी प्रकाशित हुई। हम सब सिडनी के हिन्दी प्रेमियों की ओर से काम्बोज जी को हार्दिक बधाई....



"चक्रव्यूह"











7 comments:

  1. रामेश्वर जी,
    सबसे पहले हम सब आपका फिर से स्वागत करते हैं ....सिडनी में !!
    भावना जी का शुक्रिया।
    रामेश्वर जी की लघुकथा पढ़वाने के लिए ।
    जीवन की सच्ची कथा है ये....
    ज़िन्दगी कई बार आदमी को दोराहे पर ले आती है और वह समझ नहीं पाता कि क्या करूँ?
    कितनी गहरी बात कह डाली आपने !!

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है!
    या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
    नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

    मरद उपजाए धान ! तो औरत बड़ी लच्छनमान !!, राजभाषा हिन्दी पर कहानी ऐसे बनी

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  3. कल बाहर था इसलिए इस पोस्ट को नही देख सका!
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    आपने बहुत ही उम्दा पोस्ट लगाई है!
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    रामेश्वर जी की लघुकथा पढ़वाने के लिए धन्यवाद!
    --
    नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    --
    जय माता जी की!

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  4. Respected sir,
    Is dil ko choo lene wali laghukatha "Chakraviyuh" ke Sydney ki patrika Hindi Gaurav mein prakashit hone par hardic badhai.

    From:- T.H.Khan & Mumtaz

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  5. अच्छी पोस्ट के लिए धन्यवाद. कम्बोज जी वहाँ किस व्यवसाय में हैं.

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  6. बहुत बहुत बधाई...।

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  7. खुशकिस्मती है हमारी कि हमें आप सा मार्गदर्शक मिला,


    जो हाथ में कलम की मशाल लेकर राह दिखाता है।
    थककर हारकर बैठ जाएं गर हम तो,
    उंगली थामकर मंजिल की ओर बढ़ाता है।

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