Friday, September 3, 2010

भाई बहन का प्यार

भाई बहन के प्यार को आगे बढ़ाने का प्रयास किया शायद आपको पंसद आए ...

गंगा की धार
है बहनों का प्यार
बही बयार। रा०


अधूरा प्यार
शामिल न जिसमें
भाई दुलार। भा०


पावन मन
जैसे नील गगन
नहीं है छोर ।रा०


भाई बहन
चाँद और सितारे
झूमे गगन। भा०


शीतल छाँव
ये जहाँ धरे पाँव
मेरी बहन । रा०


थमी रूलाई
लो परदेस आया
मेरा भी भाई। भा०


भावना

7 comments:

  1. अनोखा।
    अद्भुत!
    बहुत संवेदनशील।

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  2. भाई बहनों की पावनता को रचना ने और सरस बना दिया ।

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  3. बहुत बढ़िया जुगलबंदी..आनन्द आ गया.

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  4. बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने! भाई बहन का प्यार तो अटूट होता है!

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  5. रचना बहुत अच्छी लगी।


    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    स्‍वच्‍छंदतावाद और काव्‍य प्रयोजन , राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

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  6. भाई-बहिन के प्यार को कितने सुन्दर शब्दों में बाँधा है.....लगता ही नहीं कि यह किसी दो कलमों ने लिखा है....
    दो कलमें और एक विचार
    वाह ! जी ! वाह !
    मन खुश हो गया पढ़कर !
    ऐसे ही आप दोनों की कलम कुछ नया लिखती रहे...यही है मेरी दुया रब्ब से !!!

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  7. दो अलग-अलग लोगों द्वारा जुगलबन्दी की यह अनोखी मिसाल देखी...सच में , मज़ा तो आया और साथ ही दोनो को बधाई दिए बिना मन नहीं माना...।

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