Wednesday, July 22, 2009

मैं उजाला हूँ


मैं उजाला हूँ
-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

मैं उजाला हूँ ,उजाला ही रहूँगा ।
अँधेरी गलियों में ज्योति-सा बहूँगा ।
चाँद मुझे गह लेंगे कुछ पल के लिए ,
पर मैं रोशनी की कहानी कहूँगा ॥
XXXXXX
पल जो भी मिले  हैं मुझे उपहार में ।
उनको लुटा दूँगा मैं सिर्फ़ प्यार में ।
 नफ़रत की फ़सलें उगाई हैं जिसने;
मिलेगा उसे क्या अब इस संसार में ॥

[22 जुलाई 2009]