Saturday, November 7, 2009

मैं उजाला हूँ


-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
मैं उजाला हूँ ,उजाला ही रहूँगा ।
अँधेरी गलियों में ज्योति-सा बहूँगा ।
चाँद मुझे गह लेंगे कुछ पल के लिए ,पर मैं रोशनी की कहानी कहूँगा ॥



पल जो भी मिले हैं मुझे उपहार में ।
उनको लुटा दूँगा मैं सिर्फ़ प्यार में ।
नफ़रत की फ़सलें उगाई हैं जिसने;
मिलेगा उसे क्या अब इस संसार में ॥

2 comments:

  1. Ek Ek pankti men sach ki khusbu aa rahi hai ...
    चाँद मुझे गह लेंगे कुछ पल के लिए ,
    पर मैं रोशनी की कहानी कहूँगा ॥
    ye pnktiyan bahut khubsurat han.
    badhi bahut-2

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