Monday, May 11, 2009

मणिमाला-1


मणिमाला-1

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
1-बड़ा काम
        जो किसी काम को छोटा समझकर उसे करना नहीं चाहता,वह  ज़िन्दगी में कभी बड़ा काम नहीं कर सकता ।
2-सदाचारी
       सदाचारी व्यक्ति अपने  कार्यों से बड़े बनते हैं। दुराचारी व्यक्ति दूसरों के काम में बाधाएँ उत्पन्न करके बड़प्पन बटोरना चाहते हैं ;लेकिन एक  न एक दिन उनकी कलई खुल जाती है ।
3-विश्वासघात
       मित्रों से विश्वासघात करनेवाला व्यक्ति खुद से भी विश्वासघात करता है ।
4-कपट-भावना
       धूर्त्त व्यक्ति अपनी मीठी-मीठी बातों का सहारा रोज़-रोज़ नहीं ले सकता ।   उसकी कपट-भावना  कभी न कभी प्रकट हो ही जाती है ।
5-शिक्षक
       जिस शिक्षक के मन में जाति-पाँति  और ऊँच-नीच का कूड़ा-कचरा भरा होता है, वह कभी विद्यार्थियों के हृदय को नहीं जीत सकता है ।
6-चापलूस
       चापलूस  व्यक्ति अपना स्वार्थ सिद्ध हो जाने पर अजनबी जैसा व्यवहार करने लगता है ।
7-चुगलखोर
              चुगलखोर पर कभी विश्वास मत करो ।उसके लिए न कोई अपना है और न पराया ।उसकी जीभ को तो विष-वमन करने में ही आनन्द मिलता है ।
8-ईर्ष्या
      ईर्ष्या का प्रारम्भ दुर्बलता  से होता है । मानसिक रूप से पंगु व्यक्ति ईर्ष्या में रात दिन जलकर अपने विवेक की भी हत्या कर देते हैं ।
[10 -8-1986]

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