Friday, April 17, 2009

जूते और वोट



-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
जूते
जूते में गुन बहुत से, सदा राखियो संग ।
गुण्डे नेता हों जहाँ , वहाँ दिखाए रंग ॥

वहाँ दिखाए रंग,झपट  दुष्टों को मारे ।
यह घमण्ड का भूत , सिर से तुरन्त उतारे ॥

इसका जोड़ न तोड़ सभी कुछ इसके बूते ।
परमाणु से भारी , पड़ते पाँव के जूते ॥
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वोट

लोकतन्त्र में वोट है , बहुत बड़ा हथियार ।
यही इन्द्र का बज्र है ,  करे अमोघ प्रहार ॥
करे अमोघ प्रहार ,टिकते न गाली जूते ।
सदा बदलता तंत्र , केवल  इसी  के बूते ॥
गाली जूते छोड़ , इसी को सब अपनाओ 
वोट -चोट का मन्त्र ,सभीको जा बतलाओ ।।

1 comment:

  1. पांव के जूते

    भारी तो होंगे ही

    पूरे शरीर का

    वजन वे ही तो

    संभालते हैं

    और शरीर के

    पापों का भी ....

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