Sunday, November 16, 2008

राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह का आयोजन







राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह का आयोजन


यहनेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया द्वारा भारत के विभिन्न नगरों में 14-20 तक राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।पुस्तक पढ़ने की संस्कृति के उन्नयन के लिए पं नेहरू जी ने 1 अगस्त 1957 में नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया की स्थापना की थी नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया ने राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह के अन्तर्गत देश के विभिन्न भागों में पुस्तका-विमोचन के साथ-साथ निबन्धप्रतियोगिता,विचार-विमर्श,कवि-दरबार आदि विभिन्न कार्यक्रमा की योजना बनाई है ।इसी सन्दर्भ में नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया नेहरू भवन दिल्ली में राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह के अवसर पर विभिन्न माध्यमों के द्वारा कहानी-कथन को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है कार्यक्रम का शुभारम्भ नेशनल बुक ट्र्स्ट इण्डिया के अध्यक्ष प्रो विपिन चन्द्रा जी के द्वारा पुस्तकालय ऑटोमेशन के उद्घाटन से हुआ एक महत्त्वपूर्ण योजना है जो पुस्तक प्रेमियों को जो्ड़ने का काम करेगी ।इसके बाद प्रो चन्द्रा जी ने पोस्टर एवं पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया कहानीकथन सत्र में 6-12 आयु वर्ग के बच्चों के समक्ष चित्रकार जगदीश जोशी,श्रीमती क्षमा शर्मा ,श्रीमती दीपा अग्रवाल ने कहानीकथन के बारे में अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। जोशी जी ने कहाचित्र के हिसाब से कहानी लिखना एक कठिन काम है ,कहानी के विषय पर चित्र बनाना हो तो यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि चित्रों में विविधता बनी रहे ।भारत में प्राय: 16 पृष्ठों की सचित्र पुस्तकों का प्रकाशन हो्ता है ;जिसमें 7-8 चित्रों के लिए जगह मिल पाती है चित्रों का कहानी के विषय के अथ तालमेल होना चाहिए चित्र कथा की सिच्युएशन के अनुसार परिवर्तनशील हों श्रीमती दीपा अग्रवाल ने कहानी का विशेष गुण बतायादूसरों को जोड़ना,संवाद स्थापित करना एवं व्यापक फलक पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान करना ।कहानी शब्दों के माध्यम से एक प्रकार का मानसिक पोषण है।,श्रीमती क्षमा शर्मा ने कहानी के लिए श्रोता की भागीदारी ,उत्सुकता को प्रमुख बताया बच्चों के बीच की कथावस्तु (बस्ता)को आधार बनाकर रोचक कहानी का सूत्रपात किया ।इसी प्रकार –‘एक जंगल थाको केन्द्र में रखकर पक्षी थे ,खिड़की थी, खिड़की से झाँकते बच्चे थे-इस प्रकार कहानी को बच्चों की सहभागिता से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को समझाया ।वर्तमान परिस्थितियाँ कितनी कटु हो गई हैं कि बच्चों का कोमल मन भी उससे अछूता नहीं रह सका है ।गुड़गाँव के स्कूल के बच्चों द्वारा लिखी गई कहानियों के अन्त (सभी बच्चों ने कहानी का अन्त बम ब्लास्ट से किया था) की समानता पर चिन्ता प्रकट करते हुए कहाहमें हँसते दौड़ते बच्चे चाहिए जो कहानियाँ लिखी जाएँ वे शोषण गरीबी और अन्याय के खिलाफ़ हों अध्यक्ष पद से बोलते हुए प्रो विपिन चन्द्रा जी ने अपने बचपन में सुनी कहानी के माध्यम से जीवन के सकारात्मक पहलू को उभारने पर बल दिया ।श्री मानस रंजन महापात्र ने निदेशक श्रीमती नुज़्हत हसन के प्रति आभार प्रकट किया ;जिन्होंने इस कार्यक्रम को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने का परामर्श दिया था ।श्री द्विजेन्द्र कुमार ने कार्य क्रम का संचालन किया दूसरे सत्र में प्रसिद्ध कथाकार श्रीमती सुरेखा पाणंदीकर ने विभिन्न विद्यालयों के छात्रों के सम्मुख रोचक ढग सेराक्षस की लोरीऔरकौन बनेगा राजाकहानियाँ सुनाईं ।इस सत्र में बच्चों ने भी कहानी में सहभागिता की बच्चों के चेहरों पर झलक रहे आत्मविश्वास और प्रसन्नता ने इस सत्र को बहुत रोचकता प्रदान की लाखों में छपने वाले अखबार बीस करोड़ बच्चों को भुलाने में पीछे नहीं हैं। अपठनीयता के वर्तमान संकट में इस तरह के कार्यक्रम कठिन तपिश में फुहार-सा वातवरण प्रदान करते हैं। इस अवसर पर प्रसिद्ध व्यंग्य चित्रकार श्री आबिद सुरती भी मौज़ूद थे ।पुस्तक प्रदर्शनी में पुस्तक महल ,साहित्य अकादमी ,आर्य बुक डिपो ,एन सी आर टी, नेशनल बुक ट्र्स्ट, प्रथम बुक्स रूम टू रीड इंडिया आदि प्रकाशकों ने भाग लिया यह प्रदर्शनी 20 नवम्बर तक रहेगी
प्रस्तुति :- रामेश्वर काम्बोजहिमांशु rdkamboj@gmail.com

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