Saturday, September 6, 2008

14-हाइकु

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
1-
आपकी बातें
खुशबू के झरने
चाँदनी रातें ।
2-
पहला स्पर्श
रोम-रोम बना है
जल –तरंग ।

3-
आज ये पल
जाह्नवी कल-कल
पावन जल ।
4-
प्यार से भरे
नयन डरे-डरे
संताप हरे ।
5-
भोर चिरैया
तरु पर चहके
घर महके ।
20जुलाई 2008
6-
बेटी का प्यार-
कभी न सूखे,ऐसी
है रसधार ।
7-
मोती –से आँसू
बहकर निकले
दमका रूप ।
8-
प्यार का कर्ज़
लगता कम पर
चुकता नहीं ।

9-
ये स्कूली बच्चे
बिन परों के पाखी
उड़ते रहें।
10-
चरण छूना
नस-नस में जैसे
प्रेम जगाना
11-
धरती जागी
ये अम्बर नहाया
चाँद मुस्काया।
12-
चुकाएँ कैसे ?
जो भी तुमने दिया
हमने लिया।
13-
प्यारी दुनिया-
अब जाना हमने
इसे सींचना ।
14-
पढ़ें पहाड़ा
गाएँ मिलके गीत
सच्चा संगीत ।

1 comment:

  1. बेहतरीन हाईकु. आनन्द आ गया पढ़कर.

    ----------------------

    निवेदन

    आप लिखते हैं, अपने ब्लॉग पर छापते हैं. आप चाहते हैं लोग आपको पढ़ें और आपको बतायें कि उनकी प्रतिक्रिया क्या है.

    ऐसा ही सब चाहते हैं.

    कृप्या दूसरों को पढ़ने और टिप्पणी कर अपनी प्रतिक्रिया देने में संकोच न करें.

    हिन्दी चिट्ठाकारी को सुदृण बनाने एवं उसके प्रसार-प्रचार के लिए यह कदम अति महत्वपूर्ण है, इसमें अपना भरसक योगदान करें.

    -समीर लाल
    -उड़न तश्तरी

    ReplyDelete