Friday, August 8, 2008

इसे ध्यान में रखना

 

इसे ध्यान में रखना

-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

जो करना है  सो कर ।

जब मरना है तब मर॥

अहसानों का बदला जग में

कुछ भी हो सकता है॥

जिसकी खातिर फूल बिछाए

काँटे बो सकता है ।

इसे ध्यान में रखना ॥

 

ये   बेटे  ये भाई

इतनी हुई  कमाई ।

समझो आने वाले कल में

सब कुछ ढह सकता है।

सम्बन्धों का यह प्रासाद

पल में बह सकता है ।।

इसे ध्यान में रखना ॥

 

ये  मुस्काकर  मिलते

सदा कमल से खिलते ।

मुखड़े पर आभा उतरी है

दिल में दाग़ भरे हैं।

वाणी में मिसरी घोली है

मन में कपट धरे हैं ॥

इसे ध्यान में रखना ॥

 

अपनेपन की बातें

झूठे रिश्ते-नाते ।

मंज़िल तक तो जाना होगा

तुमको निपट अकेले।

साथ तुम्हारे नहीं रहेंगे

ये जीवन के मेले॥

इसे ध्यान में रखना ॥

 

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-10-4-2008(ग्वालियर)

2 comments:

  1. ‘क्या तुम्हें नज़र नहीं आता
    कि हमारी आज़ादियाँ दरअसल
    सेठों , नौकरशाहों और राजनेताओं ने
    अपनी अंटी में बाँध ली हैं।’

    सोलह आने सच ! चंद शब्दों में राजनीति की पूरी की पूरी तस्वीर उतार कर रख दी है. एक सार्थक रचना
    मंजु

    मंजु

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  2. ‘नई रोशनी मिल जाएगी
    जगनू होंगे ,दीपक होगा
    चाँद सितारे कुछ तो होंगे
    सूरज भी आ ही जाएगा
    आस न छोड़ो।’

    वो सुबह कभी तो आएगी...... आस न छोड़ना उम्मीद पे दुनिया कायम है.
    मंजु

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