Sunday, September 16, 2007

जीवन-धारा

पहाड़ पर चढ़ना कठिन है ,इसी तरह ईमानदारी का जीवन जीना दुष्कर है;पतन होना भी कठिन है।
बेईमानी का जीवन जीना आसान है ; उसी तरह पतन का मार्ग भी आसान है।गिर पड़े तो सँभलना लगभग असंभव है ।
अत: कठिनाइयों में भी सच्चे मार्ग का अनुसरण करो ।

Thursday, September 13, 2007

शृंगार है हिन्दी


खुसरो के हृदय का उद्गार है हिन्दी ।
कबीर के दोहों का संसार है हिन्दी ।।

मीरा के मन की पीर बन गूँजती घर- -घर ।

सूर के सागर- सा विस्तार है हिन्दी ।।

जन-जन के मानस में ,बस गई जो गहरे तक ।
तुलसी के 'मानस' का विस्तार है हिन्दी ।।

दादू और रैदास ने गाया है झूमकर ।
छू गई है मन के सभी तार है हिन्दी ।।

'सत्यार्थप्रकाश' बन अँधेरा मिटा दिया ।

टंकारा के दयानन्द की टंकार है हिन्दी ।।

गाँधी की वाणी बन भारत जगा दिया ।
आज़ादी के गीतों की ललकार है हिन्दी ।।

'कामायनी' का 'उर्वशी’ का रूप है इसमें ।
'आँसू’ की करुण ,,सहज जलधार है हिन्दी ।।

प्रसाद ने हिमाद्रि से ऊँचा उठा दिया।
निराला की वीणा वादिनी झंकार है हिन्दी।।

पीड़ित की पीर घुलकर यह 'गोदान' बन गई ।
भारत का है गौरव , शृंगार है हिन्दी ।।

'मधुशाला' की मधुरता है इसमें घुली हुई ।
दिनकर के काव्य  की हुंकार है हिन्दी ।।

भारत को समझना है तो जानिए इसको ।
दुनिया भर में पा रही विस्तार है हिन्दी ।।

सबके दिलों को जोड़ने का काम कर रही ।
देश का स्वाभिमान है ,आधार है हिन्दी ।।