Saturday, March 3, 2007

शुभकामनाएँ !

कोई नहीं उदास हो

सोए मन में रह-रह करके
अंकुर फूटे आस के ।
जंगल पर मदहोशी छाई
दहके फूल पलाश के ।।
रंगों का त्यौहार मनाने
धरती भाव- विभोर है ।
झोली भर-भर खुशबू लेकर
फूल खिले चहुँ ओर हैं ॥
होली की लपटों में सारे
भेद-भाव का नाश हो ।
सबके चेहरों पर गुलाल हो
कोई नहीं उदास हो ॥
-0-
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

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