Tuesday, March 27, 2007

बाल-जगत

हम चाँद बनेंगे

हम चाँद बनेंगे
अँधियारे में
पथ दिखलाएँगे
हम बन कर तारे
सूने नभ में
फूल खिलाएँगे ।

हम बनकर सूरज
नया उजाला
लेकर आएँगे ।
हम बनकर भौंरे
उपवन-उपवन
गीत सुनाएँगे ।

हम फूल बनेंगे
प्यारी खुशबू
रोज लुटाएँगे ।
अब हमने ठाना
इस धरती को
स्वर्ग बनाएँगे ।
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सूरज का गुस्सा

सूरज को गुस्सा आता
धरती को जड़ता चाँटे ।
मन में जितनी आग भरी
सारी दुनिया को बाँटे ।

झुलसे पेड़ों के पत्ते
पौधे सारे कुम्हलाए ।
प्यासे गैया-बकरी भी
पानी-पानी चिल्लाए ।

चीख सुनी जब बादल ने
दौड़ा-दौड़ा वह आया ।
दशा देखकर धरती की
जीभर पानी बरसाया ।
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सबसे प्यारे

सूरज मुझको लगता प्यारा
लेकर आता है उजियारा ।
सूरज से भी लगते प्यारे
टिम-टिम करते नन्हें तारे।
तारों से भी प्यारा अम्बर
बाँटे खुशियाँ झोली भर-भर।
चन्दा अम्बर से भी प्यारा
गोरा चिट्टा और दुलारा ।
चन्दा से भी प्यारी धरती
जिस पर नदियाँ कल-कल करती ।
पेड़ों की हरियाली ओढ़े
हम सबके है मन को हरती ।
हँसी दूध –सी जोश नदी –सा
भोले मुखड़े मन के सच्चे ।
धरती से प्यारे भी लगते
खिल-खिल करते नन्हें बच्चे ।
इन बच्चों में राम बसे हैं
ये ही अपने किशन कन्हाई ।
इन बच्चों में काबा-काशी
और नहीं है तीरथ है भाई ।
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खेल-गीत -
अक्कड़-बक्कड़

अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो
आसमान में बादल सौ ।
सौ बादल हैं प्यारे
रंग हैं जिनके न्यारे ।

हर बादल की भेड़ें सौ
हर भेड़ के रंग हैं दो ।
भेड़ें दौड़ लगाती हैं
नहीं पकड़ में आती हैं ।

बादल थककर चूर हुआ
रोने को मज़बूर हुआ ।
आँसू धरती पर आए
नन्हें पौधे हरषाए ।

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